23 Mar 2026, Mon

भारत-चीन के रिश्ते होंगे और मजबूत, बीजिंग ने की दुर्लभ धातुओं के निर्यात को मंजूरी देने की घोषणा

बीजिंग, चीन। चीन ने शुक्रवार को नागरिक उपयोग के लिए दुर्लभ धातुओं के निर्यात को मंजूरी देने का ऐलान किया है। यह कदम भारत सहित कई देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इन धातुओं का इस्तेमाल आधुनिक तकनीकी उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और नवीकरणीय ऊर्जा उद्योगों में किया जाता है।

चीन की यह घोषणा भारत-चीन के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बीते कुछ समय से चीन ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कुछ दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। इस कदम के बाद अब वैश्विक बाजार में राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

चीनी विदेश मंत्रालय का बयान

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर नियंत्रण कानूनों और नियमों के अनुसार है और इसका उद्देश्य किसी विशेष देश को लक्षित करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि,
“जब तक निर्यात नागरिक उपयोग के लिए है और संबंधित नियमों का पालन किया जाता है, चीनी सरकार समय पर आवेदनों को मंजूरी दे देगी।”

गुओ ने यह भी कहा कि रक्षा उत्पादों में उपयोग होने वाली धातुओं के निर्यात पर चीन सख्त रुख बरकरार रखेगा। परमिट केवल नागरिक उपयोग के लिए जारी किए जाएंगे क्योंकि इन धातुओं का सैन्य उपकरणों में भी इस्तेमाल हो सकता है।

चीन की वैश्विक भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के दुर्लभ धातु भंडार पर चीन का लगभग एकाधिकार है। इस प्रकार, चीन की नीति वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता पर सीधा असर डालती है। गुओ ने कहा कि चीन संबंधित देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता बनी रहे।

चीन ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवीकरणीय ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों में इन धातुओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत जैसे देशों के लिए यह कदम आपूर्ति श्रृंखला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत इन धातुओं का इस्तेमाल तेजी से विकसित हो रहे उद्योगों में करता है।

भारत-चीन रिश्तों पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत और चीन के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, वैश्विक तकनीकी बाजार में भी स्थिरता बनी रहेगी और भारतीय कंपनियों के लिए दुर्लभ धातुओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

इस तरह चीन की यह नीति न केवल वैश्विक उद्योगों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि भारत-चीन रिश्तों में सकारात्मकता और भरोसे का संकेत भी देती है।

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