20 फरवरी 1947: जब क्लेमेंट एटली ने भारत की आजादी का किया ऐलान
नई दिल्ली। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 20 फरवरी की तारीख बेहद अहम मानी जाती है। यही वह दिन था जब ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में ऐलान किया कि ब्रिटिश सरकार भारत को सत्ता हस्तांतरित करेगी। इस घोषणा ने आजादी की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से दिशा दी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया।
क्या थी एटली की घोषणा?
20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश संसद में दिए गए अपने बयान में एटली ने कहा कि ब्रिटेन जून 1948 तक भारत में सत्ता का हस्तांतरण कर देगा। यानी उस समय तय की गई अंतिम समयसीमा 30 जून 1948 थी।
हालांकि, उस वक्त 15 अगस्त 1947 की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई थी। एटली की घोषणा का मकसद था भारत में तेजी से बिगड़ते हालात, सांप्रदायिक तनाव और प्रशासनिक चुनौतियों के बीच सत्ता हस्तांतरण की स्पष्ट समयसीमा तय करना।
तेजी से बदले हालात
एटली की घोषणा के बाद घटनाक्रम तेजी से बदलने लगे। ब्रिटिश सरकार ने भारत में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लॉर्ड माउंटबेटन को अंतिम वायसराय बनाकर भेजा। बदलते राजनीतिक हालात, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेद, और बढ़ती हिंसा को देखते हुए सत्ता हस्तांतरण की तारीख आगे खिसकाकर 15 अगस्त 1947 कर दी गई।
इस तरह भारत को तय समयसीमा से लगभग 10 महीने पहले स्वतंत्रता मिल गई। 15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ और एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
एटली की भूमिका क्यों अहम?
क्लेमेंट एटली लेबर पार्टी के नेता थे और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की सत्ता में आए। युद्ध के बाद ब्रिटेन आर्थिक रूप से कमजोर हो चुका था और भारत में स्वतंत्रता आंदोलन बेहद मजबूत हो गया था। ऐसे में एटली सरकार ने यह महसूस किया कि भारत पर शासन बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है।
एटली की 20 फरवरी 1947 की घोषणा ने यह साफ कर दिया था कि ब्रिटेन अब भारत में लंबे समय तक शासन नहीं करेगा। यही वजह है कि यह तारीख भारत के स्वतंत्रता इतिहास में विशेष महत्व रखती है।
ऐतिहासिक महत्व
20 फरवरी की घोषणा ने भारतीय नेताओं और जनता को यह भरोसा दिया कि स्वतंत्रता अब दूर नहीं है। इसके बाद राजनीतिक बातचीत तेज हुई और अंततः देश ने आजादी हासिल की।
आज भी 20 फरवरी 1947 को उस ऐतिहासिक क्षण के रूप में याद किया जाता है, जब ब्रिटेन ने पहली बार औपचारिक रूप से भारत को आजाद करने की समयसीमा तय की थी।

