नई दिल्ली: देशभर के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार बैंक जमाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। जानकारी के अनुसार, सरकार बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस (जमा बीमा) की सीमा को मौजूदा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7.5 लाख रुपये करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेज दिया है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो बैंक में जमा धनराशि पर ग्राहकों को पहले से अधिक सुरक्षा मिलेगी। इससे खास तौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों, वरिष्ठ नागरिकों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले लोगों को बड़ा फायदा होगा।
क्या है जमा बीमा योजना?
भारत में बैंक जमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली संस्था डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के पास होती है। यदि किसी बैंक का लाइसेंस रद्द हो जाता है, बैंक बंद हो जाता है या उस पर प्रतिबंध लग जाता है, तो DICGC ग्राहकों को तय सीमा तक उनकी जमा राशि वापस दिलाने का काम करती है।
वर्तमान नियमों के तहत किसी एक बैंक में ग्राहक की बचत खाता, चालू खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) समेत कुल जमा राशि पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं।
2020 के बाद पहली बार बढ़ सकती है सीमा
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में सरकार ने जमा बीमा की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की थी। उस समय कई सहकारी बैंकों और निजी बैंकों से जुड़े संकट के बाद जमाकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब छह साल बाद सरकार एक बार फिर इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही है।
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग प्रणाली में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए जमाओं की सुरक्षा बेहद जरूरी है। हाल के वर्षों में कई सहकारी बैंकों पर कार्रवाई हुई है, जिसके बाद DICGC को हजारों ग्राहकों के दावों का भुगतान करना पड़ा। यदि बीमा कवर 7.5 लाख रुपये तक बढ़ता है, तो ग्राहकों को 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी।
जोखिम के आधार पर तय होगा प्रीमियम
सरकार जमा बीमा व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। इसके तहत सभी बैंकों से समान प्रीमियम लेने के बजाय उनकी वित्तीय स्थिति और जोखिम के आधार पर अलग-अलग प्रीमियम तय किया जाएगा। मजबूत वित्तीय स्थिति वाले बैंकों को कम प्रीमियम देना होगा, जबकि अधिक जोखिम वाले बैंकों पर ज्यादा शुल्क लगाया जाएगा।
DICGC के पास मजबूत फंड
31 मार्च 2026 तक DICGC के जमा बीमा कोष का आकार 2.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान संस्था ने करीब 1,988 करोड़ रुपये के दावों का निपटान किया। इससे स्पष्ट है कि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संस्था के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं।
सरकार का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों के विश्वास को और मजबूत करने के साथ-साथ वित्तीय सुरक्षा को नई मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।

