दिनाजपुर (बांग्लादेश) | बांग्लादेश की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की कैबिनेट में मंत्री रह चुके रमेश चंद्र सेन की शनिवार को जेल के भीतर रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। 85 वर्षीय रमेश चंद्र सेन बांग्लादेश अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और पूर्व जल संसाधन मंत्री थे। उनकी मौत ऐसे समय में हुई है, जब देश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
जेल प्रशासन के अनुसार, रमेश चंद्र सेन की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि, अवामी लीग और उनके समर्थकों ने इस मौत को संदिग्ध बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
जेल में अचानक बिगड़ी तबीयत
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार सुबह दिनाजपुर जिला जेल में बंद रमेश चंद्र सेन को अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हुई। जेल अधिकारियों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। दिनाजपुर जिला जेल के सुपरिंटेंडेंट फरहाद सरकार ने मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
हालांकि, जेल प्रशासन ने मौत को प्राकृतिक बताया है, लेकिन विपक्षी दल और अवामी लीग के नेताओं ने हिरासत में मौत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद हुई थी गिरफ्तारी
रमेश चंद्र सेन को 16 अगस्त 2024 को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ कर दिया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिनाजपुर जिला जेल भेजा गया था। उन पर तीन आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें एक हत्या का मामला भी शामिल था।
इसके अलावा, उन पर छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने और विस्फोटक अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए थे। इन्हीं मामलों के चलते वह लगातार जेल में बंद थे।
पांच बार सांसद रह चुके थे रमेश चंद्र सेन
रमेश चंद्र सेन का जन्म 30 अप्रैल 1940 को ठाकुरगांव जिले के काशलगांव गांव में हुआ था। उन्होंने रंगपुर के कार्माइकल कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी। अपने लंबे राजनीतिक करियर में वह पांच बार संसद सदस्य चुने गए।
हाल ही में वर्ष 2024 में उन्होंने ठाकुरगांव-1 सीट से अवामी लीग के टिकट पर चुनाव जीता था। हालांकि, छात्र-जन विद्रोह के बाद जब राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने संसद भंग की, तो वह अपनी संसदीय सीट खो बैठे।
हसीना के करीबी और भरोसेमंद नेता
रमेश चंद्र सेन को शेख हसीना का विश्वसनीय सहयोगी माना जाता था। वे अवामी लीग के प्रेसिडियम सदस्य भी रह चुके थे और सरकार में कई अहम फैसलों का हिस्सा थे। उनकी मौत को मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता और पूर्व अवामी लीग नेताओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।
चुनाव से ठीक पहले जेल में हुई इस मौत ने बांग्लादेश की राजनीति को और गरमा दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले की जांच किस स्तर तक और कितनी पारदर्शिता से कराती है।

