Gujarat News: 26 साल पुराने जमीन घोटाले में पूर्व कॉर्पोरेटर पर कार्रवाई, कांग्रेस ने उठाए सवाल
गुजरात के खेड़ा जिले में जमीन धोखाधड़ी से जुड़ा एक पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अहमदाबाद के पूर्व कॉर्पोरेटर तस्लीमाआलम तिरमीजी पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें दावा किया गया है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को किसान घोषित किया और करोड़ों की जमीन हड़प ली। यह मामला लगभग 26 साल पुराना बताया जा रहा है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले हुई कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 2000 से जुड़ा है, जब कपड़वंज तहसील के पुनादरा गांव में एक मृतक किसान अकबरखान पठान की संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि तस्लीमाआलम ने खुद को अकबरखान पठान का वारिस दिखाते हुए फर्जी ‘पेढ़ीनामा’ (वंशावली दस्तावेज) तैयार करवाया।
इस फर्जी दस्तावेज में उन्हें मृतक किसान का उत्तराधिकारी बताया गया, जबकि जांच में यह साफ हुआ कि उनका उस परिवार से कोई संबंध नहीं था। दस्तावेज में जानबूझकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी छिपाई गईं, जैसे कि वास्तविक पारिवारिक विवरण और अन्य वारिसों का जिक्र।
फर्जी किसान कार्ड और जमीन की खरीद
जांच के अनुसार, इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर तस्लीमाआलम ने खेड़ा और अहमदाबाद जिलों में कीमती कृषि भूमि खरीदी। उन्होंने मातर और कपड़वंज के कई गांवों में जमीन के सौदे किए। फर्जी किसान कार्ड और दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीदकर कथित तौर पर बड़ा घोटाला किया गया।
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली ‘जमीन सतर्कता समिति’ ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं।
पुलिस की कार्रवाई तेज
इस मामले में पुनादरा गांव के तलाटी ईश्वरभाई ओड की शिकायत के आधार पर आतरसुंबा पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन शामिल था।
पुलिस ने यह भी बताया कि 2025 में भी इस मामले से जुड़ी एक शिकायत अहमदाबाद के वटवा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी, जिससे संकेत मिलता है कि यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में है।
कांग्रेस ने लगाया राजनीतिक साजिश का आरोप
इस कार्रवाई को लेकर गुजरात की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है। कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई चुनाव से ठीक पहले की गई है और इसका मकसद राजनीतिक लाभ लेना है।
उनका कहना है, “यह मामला 26 साल पुराना है, तो अब अचानक इसे क्यों खोला गया? यह पूरी तरह से राजनीतिक दबाव और चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है।” कांग्रेस ने इसे अपने नेता को चुनावी दौड़ से बाहर करने की कोशिश बताया है।
सियासी माहौल गर्म
इस मामले के सामने आने के बाद गुजरात में सियासी माहौल गरमा गया है। जहां एक तरफ प्रशासन और पुलिस इस मामले को कानूनी प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई मान रहा है।
निष्कर्ष
Indian National Congress द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस जांच के बीच यह मामला अब और भी पेचीदा हो गया है। Gujarat में सामने आए इस कथित घोटाले ने न केवल प्रशासन को सक्रिय किया है, बल्कि राजनीतिक बहस को भी जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और कोर्ट की कार्रवाई यह तय करेगी कि यह मामला सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई है या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद भी छिपा है।

