नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात देते हुए 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज तक का सफर अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक हो गया है। आधी रात से इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो चुकी है, जिससे यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू तक जाता है। यह एक्सप्रेसवे राज्य के 12 प्रमुख जिलों—मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज—को आपस में जोड़ता है। इससे न सिर्फ लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि व्यापार और उद्योग को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे, पेट्रोलिंग वाहन, एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा शाहजहांपुर के पास करीब 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी भी बनाई गई है, जहां आपातकालीन स्थिति में वायुसेना के विमान उतर सकते हैं।
यात्रा को तेज बनाने के लिए इस एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। जहां पहले मेरठ से प्रयागराज तक पहुंचने में 10 से 12 घंटे का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी महज 6 से 7 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे समय की बचत के साथ-साथ ईंधन की खपत भी कम होगी।
टोल शुल्क की बात करें तो कार, जीप और हल्के वाहनों के लिए लगभग 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की गई है। इस हिसाब से मेरठ से प्रयागराज तक पूरे सफर के लिए करीब 1515 रुपये का टोल देना होगा, जबकि भारी वाहनों के लिए यह दर अधिक होगी।
यह एक्सप्रेसवे न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगा। औद्योगिक निवेश बढ़ने, लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से प्रदेश के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और आने वाले समय में यह परियोजना उत्तर भारत की लाइफलाइन साबित हो सकती है।

