वॉशिंगटन: भारत पर संभावित 100 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की चर्चाओं के बीच व्हाइट हाउस से अहम प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति के काउंसलर पीटर नवारो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता व्यापार से जुड़े मुद्दों को आपसी बातचीत के जरिए सुलझा लेंगे।
मीडिया से बातचीत के दौरान नवारो से उस प्रस्तावित अमेरिकी कानून के बारे में सवाल पूछा गया, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत भी उन प्रमुख देशों में शामिल है जो रूस से ऊर्जा आयात करते हैं, इसलिए इस प्रस्ताव को लेकर नई दिल्ली में भी नजर रखी जा रही है।
नवारो ने कहा कि इस मामले में उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं है और यह मुद्दा राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के स्तर पर बातचीत से हल हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं और व्यापारिक मतभेदों का समाधान संवाद के जरिए निकाला जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस के साथ तेल व्यापार में इस स्तर पर शामिल नहीं था, लेकिन बाद के वर्षों में रूसी तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। नवारो के अनुसार, अमेरिका में इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है कि रूसी ऊर्जा व्यापार से रूस की अर्थव्यवस्था को सहायता मिलती है।
नवारो ने बताया कि उन्होंने कुछ महीने पहले इस विषय पर एक लेख लिखा था, जिसके बाद उन्हें भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से काफी आलोचना का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों का समाधान सार्वजनिक विवाद से नहीं, बल्कि कूटनीतिक बातचीत से होना चाहिए।
गौरतलब है कि 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट ने एक महत्वपूर्ण बिल पारित किया, जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। इस प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि रूसी ऊर्जा व्यापार से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियानों को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता है।
यह विधेयक सीनेट में 86-11 के बहुमत से पारित हुआ। इसका उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है जो रूस से ऊर्जा और अन्य वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात करते हैं। प्रस्ताव से भारत और चीन जैसे देशों पर संभावित प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकताओं के आधार पर होती है। भारत का यह भी तर्क रहा है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिर आपूर्ति बनाए रखना उसकी आर्थिक प्राथमिकताओं का हिस्सा है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित टैरिफ कब और किस रूप में लागू होगा। हालांकि नवारो के बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच उच्च स्तर पर बातचीत की संभावना बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है तो इसका असर द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा आयात और कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन की नीति और दोनों देशों के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर निर्भर करेगा।

