मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है, और इसका सीधा प्रभाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। खास तौर पर Strait of Hormuz में उत्पन्न संकट ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिसके चलते पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है।
पाकिस्तान में उच्च-ऑक्टेन ईंधन (हाई-ग्रेड फ्यूल) की कीमतों में करीब 200 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसकी कीमत 100 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 300 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इस फैसले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की मंजूरी के बाद लागू किया गया। यह निर्णय एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हुए।
इससे पहले भी पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा चुकी है। 6 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते पेट्रोल की कीमत 266.17 रुपये से बढ़कर 321.17 रुपये प्रति लीटर हो गई थी, जबकि डीजल की कीमत 280.86 रुपये से बढ़कर 335.86 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। इस लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की जेब पर गहरा असर डाला है।
हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक उच्च-ऑक्टेन ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन या आम लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेट्रोल पर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसका प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से अर्थव्यवस्था पर जरूर दिखेगा। विशेष रूप से लग्जरी वाहनों और उच्च श्रेणी के उपयोग में आने वाले इस ईंधन की कीमतों में वृद्धि ने समृद्ध वर्ग को भी प्रभावित किया है।
वहीं, विमानन क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं रहा है। जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भी भारी इजाफा हुआ है। घरेलू उड़ानों के किराए 2,800 से 5,000 पाकिस्तानी रुपये तक बढ़ गए हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के किराए में 10,000 से 28,000 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास तौर पर मध्य-पूर्व और मध्य एशियाई देशों के लिए उड़ानों के किराए में लगभग 15,000 रुपये तक की वृद्धि देखी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की पहले से कमजोर आर्थिक स्थिति को और अधिक संकट में डाल दिया है। बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और सीमित संसाधनों के बीच ईंधन की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी आम जनता के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है और तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो आने वाले समय में पाकिस्तान समेत अन्य आयात-निर्भर देशों की स्थिति और भी खराब हो सकती है।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुआ संकट अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर गहराई से पड़ रहा है।

