कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतीश जारकीहोली ने अपने हालिया बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी SIR प्रक्रिया को सही या वैध ठहराने की बात नहीं कही थी। मंत्री ने आरोप लगाया कि फॉर्म नंबर 7 के माध्यम से कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई है।
मंत्री की इस सफाई के बाद राज्य में मतदाता सूची और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची की शुद्धता और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
पहले बयान को लेकर हुआ था विवाद
सतीश जारकीहोली के पहले दिए गए बयान को SIR प्रक्रिया के समर्थन के रूप में देखा गया था। रिपोर्ट किए गए उनके शुरुआती रुख के अनुसार, मृत व्यक्तियों, दूसरे स्थानों पर जा चुके लोगों और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा था कि मतदाता सूची को सही बनाए रखने के लिए ऐसी प्रक्रिया उपयोगी हो सकती है।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई थी। अब मंत्री ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी बातों का अर्थ गलत निकाला गया और उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया।
फॉर्म नंबर 7 को लेकर लगाए गंभीर आरोप
मंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर फॉर्म नंबर 7 का इस्तेमाल करके कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, यह मुद्दा केवल मतदाता सूची के सामान्य पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।
फॉर्म नंबर 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने के संदर्भ में किया जाता है। हालांकि, किसी नाम को हटाने का अंतिम निर्णय निर्धारित नियमों और सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
सतीश जारकीहोली ने कहा कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व और राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे सवालों के साथ खड़े हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाने के लिए आगे भी प्रयास किए जाएंगे।
राहुल गांधी और मुख्यमंत्री के रुख का किया जिक्र
अपने स्पष्टीकरण में मंत्री ने राहुल गांधी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को जनता के सामने लाना जरूरी है। उनके मुताबिक, इस विषय पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो।
राजनीतिक बहस के बीच बढ़ी निगाहें
SIR को लेकर जारी विवाद में अब मंत्री की सफाई ने एक नया मोड़ ला दिया है। एक ओर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित अधिकारी इन दावों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल, कर्नाटक में SIR और फॉर्म नंबर 7 का मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

