नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य सरकारी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे महंगाई भत्ता (DA) विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 2008 से 2019 तक की अवधि का DA बकाया कर्मचारियों को दिया जाए। इस फैसले से राज्य के करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इससे पहले दिए गए अंतरिम आदेश के तहत बकाया राशि का कम से कम 25 प्रतिशत भुगतान 6 मार्च तक किया जाना अनिवार्य होगा। अदालत के इस निर्देश के बाद राज्य सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है, लेकिन कर्मचारियों के लिए यह फैसला लंबे संघर्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच DA को लेकर विवाद पिछले कई वर्षों से चल रहा है। केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में राज्य सरकार द्वारा कम DA दिए जाने को लेकर कर्मचारी संगठन लगातार विरोध जता रहे थे। उनका तर्क था कि राज्य सरकार को भी केंद्र के समान दरों पर DA देना चाहिए, क्योंकि महंगाई का असर सभी कर्मचारियों पर बराबर पड़ता है।
इस मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी अंतरिम आदेश पारित किया था, लेकिन भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के वैध अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकती। कोर्ट ने माना कि DA कर्मचारियों का संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है, जिसे अनिश्चित काल तक रोका नहीं जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने 2008 से 2019 तक के DA एरियर के भुगतान का निर्देश दिया।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पहले चरण में कम से कम 25% बकाया राशि 6 मार्च तक दी जानी चाहिए, जबकि शेष भुगतान को लेकर आगे की सुनवाई में दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।
कर्मचारी संगठनों में खुशी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर है। संगठनों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ आर्थिक राहत नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों की जीत है। लंबे समय से DA को लेकर चल रहे आंदोलन और कानूनी लड़ाई का अब ठोस परिणाम सामने आया है।
राज्य सरकार पर बढ़ेगा दबाव
हालांकि, इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ना तय है। एकमुश्त DA बकाया देने से राज्य के खजाने पर असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि सरकार इस आदेश के अनुपालन के लिए बजटीय प्रबंधन और भुगतान की समयसीमा को लेकर आगे की रणनीति बनाएगी।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को किस तरह और कितनी तेजी से लागू करती है। 6 मार्च की समयसीमा बेहद अहम मानी जा रही है। अगर तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो सरकार को कानूनी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, यह फैसला पश्चिम बंगाल के लाखों कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक और निर्णायक साबित हो सकता है।

