लोकसभा में गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए अहम विधेयकों पर जोरदार बहस के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने परिसीमन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में देश के किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार होगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, पूर्व हो या पश्चिम, छोटे राज्य हों या बड़े—हर राज्य के साथ न्यायपूर्ण तरीके से निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ इस सदन को भरोसा दिलाता हूं कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। यदि गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं।” उनके इस बयान को विपक्ष की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, सरकार ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए हैं—महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026। इन विधेयकों में विशेष रूप से परिसीमन बिल को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठा रही है और इससे कुछ राज्यों को नुकसान हो सकता है।
परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा में सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जाएंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। परिसीमन के बाद नई सीटों के निर्धारण से महिला आरक्षण को लागू करना अधिक प्रभावी ढंग से संभव हो सकेगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या के आंकड़ों के लिए फिलहाल 2011 की जनगणना को आधार माना जाएगा, क्योंकि यही आखिरी आधिकारिक रूप से प्रकाशित डेटा उपलब्ध है।
विपक्षी दलों का मानना है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण दक्षिणी राज्यों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि पिछले परिसीमन में जो अनुपात था, उसी के आधार पर आगे भी वृद्धि की जाएगी और किसी क्षेत्र के साथ असमानता नहीं होगी।
संसद में इन तीनों विधेयकों पर विस्तृत चर्चा के लिए लोकसभा में 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। 17 अप्रैल को चर्चा के बाद इन पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 18 अप्रैल को ये विधेयक राज्यसभा में पेश किए जाएंगे, जहां 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा।
कुल मिलाकर, परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है। जहां सरकार इसे लोकतांत्रिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर संसद में होने वाली वोटिंग और आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई है, जो देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकती है।

