नई दिल्ली: पंजाब सरकार ने ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में CBI जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने शीर्ष अदालत से मामले की जल्द सुनवाई और अर्जेंट लिस्टिंग की मांग की। उनका कहना है कि पंजाब में जल्द चुनाव होने हैं, इसलिए मामले पर शीघ्र सुनवाई जरूरी है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मामले में CBI को FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश देने का पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था। सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी सवाल उठाया, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसी को मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे।
चुनाव से पहले जल्द सुनवाई की मांग
सुनवाई के दौरान विकास सिंह ने कहा कि पंजाब में चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में मामले की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। उन्होंने अदालत से मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मामले से जुड़े आरोपों की जांच पहले से राज्य स्तर पर की जा रही थी। ऐसे में सीधे CBI जांच के लिए FIR दर्ज करने का निर्देश देने की आवश्यकता पर सवाल उठाया गया।
FIR दर्ज करने के आधार पर उठाया सवाल
सरकार की ओर से पेश वकील ने एक पुराने न्यायिक फैसले का हवाला देते हुए दलील दी कि FIR दर्ज करने के लिए किसी संज्ञेय अपराध का प्रथम दृष्टया आधार होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामला मुख्य रूप से ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आरोपों से संबंधित है।
दलील में यह भी कहा गया कि राज्य स्तर पर मामले की जांच पहले से चल रही थी। ऐसे में जांच को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
दस्तावेजों को लेकर भी जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से यह दावा भी किया गया कि जांच से संबंधित उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेज पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। वकील ने कहा कि दस्तावेजों के आधार पर लगाए गए आरोपों की प्रकृति और उनके आधार को स्पष्ट तरीके से समझना जरूरी है।
उन्होंने यह भी दलील दी कि चुनाव के समय इस तरह के मामलों के सामने आने से राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव पड़ सकता है। राज्य सरकार ने पूरे मामले को संघीय ढांचे से जुड़ा विषय भी बताया।
बुधवार या गुरुवार को हो सकती है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामले को जल्द सूचीबद्ध करने को लेकर चर्चा हुई। मुख्य न्यायाधीश की ओर से संकेत दिया गया कि मामले को बुधवार को सूचीबद्ध करने का प्रयास किया जा सकता है। यदि ऐसा संभव नहीं हुआ तो गुरुवार को सुनवाई हो सकती है।
वहीं, अदालत की ओर से यह भी टिप्पणी की गई कि एक दिन के अंतर से मामले में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बावजूद राज्य सरकार ने चुनाव नजदीक होने का हवाला देते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग दोहराई।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पंजाब में ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़ी कथित अनियमितताओं और आरोपों से संबंधित है। जांच से जुड़े दस्तावेजों और आरोपों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई का मुद्दा सामने आया था।
इसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी को FIR दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया। पंजाब सरकार ने इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
अब शीर्ष अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि CBI जांच के संबंध में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगती है या जांच आगे बढ़ती है। मामले की अगली सुनवाई को लेकर अदालत के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

