चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा लोकसभा सांसद उस समय चर्चा में आ गए, जब उनकी परीक्षा देते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। तस्वीर सामने आने के बाद परीक्षा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। कुछ लोगों ने सवाल किया कि यदि परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होती, तो वहां से तस्वीर कैसे सामने आई। इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
हालांकि, विवाद के बीच सांसद ने परीक्षा में शामिल होने की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि वह लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे हैं और उनकी यह अंतिम परीक्षा थी। उन्होंने बताया कि वह सार्वजनिक नीति और उसमें सुधार के क्षेत्र में आगे शोध करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने मास्टर डिग्री की पढ़ाई शुरू की थी।
परीक्षा की वजह से अहम बैठक में नहीं हुए शामिल
जिस दिन उनकी परीक्षा थी, उसी दिन पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक राजधानी में आयोजित की गई थी। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सांसद के बैठक में शामिल नहीं होने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी वजह को लेकर सवाल उठने लगे।
बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्होंने पार्टी नेतृत्व से पहले ही अनुमति मांगी थी। उनके अनुसार, पार्टी की ओर से उन्हें बैठक में शामिल नहीं होने की इजाजत दी गई थी। इसलिए उनकी गैरहाजिरी को पार्टी से दूरी या किसी राजनीतिक कारण से जोड़ना सही नहीं है।
बोले- परीक्षा छोड़ता तो एक साल की देरी होती
सांसद ने बताया कि यदि वह निर्धारित परीक्षा में शामिल नहीं होते तो उनकी डिग्री पूरी होने में करीब एक साल की देरी हो सकती थी। इसका असर उनके आगे के शोध कार्य पर भी पड़ता। उन्होंने कहा कि वह सार्वजनिक नीतियों में सुधार से जुड़े विषयों पर आगे अध्ययन और शोध करना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले ही राजनीति विज्ञान में पीएचडी पूरी कर चुके हैं। अब मास्टर डिग्री के बाद उनका लक्ष्य सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों पर आगे शोध करना है। उनका कहना है कि शिक्षा और शोध के माध्यम से वह नीतियों में सुधार के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं।
तस्वीर को लेकर उठे सवाल
परीक्षा देते हुए तस्वीर वायरल होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा परीक्षा केंद्र के नियमों को लेकर हो रही है। सवाल यह है कि परीक्षा के दौरान तस्वीर किस तरह खींची गई और क्या परीक्षा केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित नियमों का पालन हुआ था।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर किसने खींची या परीक्षा केंद्र के भीतर इसे लेने की अनुमति थी या नहीं। इसलिए इस पहलू पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित अधिकारियों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
पंजाब की राजनीति में भी सक्रिय हैं सांसद
शिक्षा से जुड़े इस घटनाक्रम के अलावा सांसद पंजाब की राजनीति को लेकर भी लगातार चर्चा में रहे हैं। राज्य में अगले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर संगठन और नेतृत्व को लेकर कई मुद्दे सामने आते रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव से पहले आंतरिक मतभेदों को दूर कर संगठन को मजबूत किया जाए।
ऐसे समय में एक वरिष्ठ नेता का महत्वपूर्ण बैठक से अनुपस्थित रहना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, परीक्षा को लेकर सामने आए उनके स्पष्टीकरण के बाद उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बैठक में शामिल नहीं होने की वजह उनकी पढ़ाई और निर्धारित परीक्षा थी।

