पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने पंजाब के पंडितों की संस्कृत भाषा पर पकड़ को लेकर टिप्पणी की है। उनके इस बयान से राजनीतिक और धार्मिक हलकों में विवाद खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है। चन्नी ने कहा कि राज्य में संस्कृत के जानकार पुजारियों की कमी के कारण कई मंदिरों में दूसरे राज्यों से पुजारी बुलाने पड़ते हैं। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। विभिन्न राजनीतिक दल जनता के बीच पहुंचकर अपने मुद्दे उठा रहे हैं और राज्य की मौजूदा स्थिति पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
बठिंडा में कार्यक्रम के दौरान दिया बयान
चरणजीत सिंह चन्नी सोमवार को बठिंडा जिले के रामपुरा फूल में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यह कार्यक्रम पूर्व कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ के स्थानीय कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित श्रीरामायण पाठ के भोग से जुड़ा था।
इस दौरान चन्नी ने पंजाब में संस्कृत की शिक्षा और धार्मिक अध्ययन के लिए विशेष विश्वविद्यालय स्थापित करने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई पंडितों की संस्कृत पर मजबूत पकड़ नहीं है, जिसके चलते मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दूसरे राज्यों से पुजारियों को बुलाना पड़ता है।
उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में इस टिप्पणी पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
कांग्रेस सरकार बनने पर संस्कृत विश्वविद्यालय का दावा
चन्नी ने कहा कि यदि पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा। उनके मुताबिक, इस विश्वविद्यालय में श्रीरामायण और श्रीमद्भागवत गीता के अध्ययन के लिए विशेष केंद्र बनाए जाने की योजना है।
उन्होंने दावा किया कि उनकी अगुआई वाली पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। हालांकि, उनके अनुसार, सत्ता परिवर्तन के बाद इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
चन्नी का कहना है कि संस्कृत शिक्षा को संस्थागत रूप देने से राज्य में धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन को बढ़ावा मिल सकता है और प्रशिक्षित पुजारियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह राजनीतिक परिस्थितियों और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा।
पंजाब सरकार पर भी साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान चन्नी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने राज्य में नशे, गैंगस्टरवाद, फिरौती और आपराधिक घटनाओं को लेकर चिंता जताई। उनका आरोप है कि लोगों में सुरक्षा को लेकर डर बढ़ा है और सरकार इन समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण करने में सफल नहीं रही है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में कारोबारियों और आम नागरिकों को भी आपराधिक गतिविधियों के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं; इन पर सरकार की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
चुनाव से पहले बढ़ सकती है बयानबाजी
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक शिक्षा, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं। चन्नी के संस्कृत संबंधी बयान पर विवाद बढ़ता है या नहीं, यह आने वाली प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल, उनके बयान ने राज्य में राजनीतिक चर्चा को नया मुद्दा दे दिया है।

