4 May 2026, Mon

नोबेल शांति पुरस्कार की रेस में असली ‘पैडमैन’ मुरुगनाथम, बदली महिलाओं की जिंदगी, अक्षय कुमार ने बनाई फिल्म

भारत के सामाजिक उद्यमी Arunachalam Muruganantham, जिन्हें ‘पैडमैन’ के नाम से जाना जाता है, ने दावा किया है कि उन्हें साल 2026 के Nobel Peace Prize के लिए नामांकित किया गया है। इस खबर के सामने आने के बाद उनकी प्रेरणादायक कहानी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक पहचान बनाने वाले मुरुगनाथम ने महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। उन्होंने ग्रामीण भारत की महिलाओं के लिए सस्ते और सुलभ सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का मिशन शुरू किया, जिससे हजारों महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आया। उनकी इसी पहल ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

मीडिया से बातचीत में मुरुगनाथम ने कहा कि जब उन्हें इस नामांकन की जानकारी मिली तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नोबेल पुरस्कार के लिए कोई व्यक्ति खुद या उसका परिवार आवेदन नहीं कर सकता, बल्कि किसी योग्य संस्था या व्यक्ति द्वारा नामांकन किया जाता है। उनके अनुसार, पुडुचेरी के अरविंद आई हॉस्पिटल से जुड़े एक डीन और अमेरिकी टीम ने मिलकर उनका नाम नोबेल समिति को भेजा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस उपलब्धि पर उन्होंने गर्व और खुशी जाहिर की।

Nobel Committee के अनुसार, वर्ष 2026 के लिए कुल 287 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है, जिनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं। ऐसे में इस प्रतिष्ठित सूची में मुरुगनाथम का नाम शामिल होना भारत के लिए गौरव की बात मानी जा रही है।

मुरुगनाथम की कहानी को देश-विदेश में व्यापक पहचान तब मिली जब बॉलीवुड अभिनेता Akshay Kumar ने उनकी जिंदगी पर आधारित फिल्म Pad Man बनाई। इस फिल्म में महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं और सामाजिक वर्जनाओं को प्रभावी तरीके से दिखाया गया था। फिल्म को दर्शकों से सराहना मिली और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

आज मुरुगनाथम न सिर्फ एक सामाजिक उद्यमी हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। उनका यह सफर यह साबित करता है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया एक प्रयास भी बड़े सामाजिक बदलाव की नींव रख सकता है।

अगर उनका यह नामांकन आगे बढ़ता है, तो यह न सिर्फ उनके व्यक्तिगत प्रयासों की जीत होगी, बल्कि भारत में महिला स्वास्थ्य और जागरूकता के क्षेत्र में किए गए कार्यों की भी वैश्विक मान्यता मानी जाएगी।

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