हंगरी के नए नेतृत्व की सख्त चेतावनी: नेतन्याहू के दौरे पर गिरफ्तारी का खतरा
यूरोप की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां पीटर मैग्यार के नेतृत्व वाली टिस्जा पार्टी ने हालिया आम चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही करीब 16 वर्षों से सत्ता में काबिज विक्टर ओर्बान को हार का सामना करना पड़ा है। अब मैग्यार के हंगरी के अगले प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, सत्ता संभालने से पहले ही उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।
मैग्यार ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि नेतन्याहू हंगरी की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उनका यह बयान सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय व्यवस्था के संदर्भ में आया है।
दरअसल, हंगरी अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का सदस्य देश है। मैग्यार ने स्पष्ट किया कि उनका देश ICC की सदस्यता जारी रखेगा और उसके नियमों का पालन करेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ ICC द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है, तो सदस्य देश होने के नाते हंगरी की जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे व्यक्ति को हिरासत में ले।
गौरतलब है कि ICC ने वर्ष 2024 में नेतन्याहू और इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इन पर गाजा में युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप लगे हैं। हालांकि, इजरायल इन आरोपों को खारिज करता रहा है और ICC के अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती देता आया है।
हंगरी के चुनाव परिणाम भी काफी चौंकाने वाले रहे। 199 सीटों वाली संसद में टिस्जा पार्टी ने 138 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि ओर्बान की पार्टी को महज 55 सीटों से संतोष करना पड़ा। यह नतीजा हंगरी की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां लंबे समय से चली आ रही सत्ता अब नए नेतृत्व के हाथ में जाने वाली है।
मैग्यार के इस सख्त बयान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक असर पड़ सकता है। इससे इजरायल और हंगरी के संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है, वहीं यूरोपीय संघ के भीतर भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है।
इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मैग्यार को उनकी जीत पर बधाई दी है। उन्होंने भारत और हंगरी के बीच मजबूत संबंधों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई है।
कुल मिलाकर, पीटर मैग्यार का यह बयान न सिर्फ उनकी राजनीतिक सोच को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में हंगरी की विदेश नीति अधिक सख्त और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति प्रतिबद्ध हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या नेतन्याहू भविष्य में हंगरी का दौरा करेंगे और यदि करते हैं, तो स्थिति किस दिशा में जाती है।

