भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में गुजरात के वडोदरा में निर्माण कार्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। यहां व्यस्त रेलवे मार्ग के ऊपर सभी 14 पोर्टल बीम लगाने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस उपलब्धि से बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। खास बात यह है कि नीचे मौजूदा रेलवे ट्रैक पर सामान्य ट्रेनों की आवाजाही जारी रहेगी, जबकि ऊपर से बुलेट ट्रेन का ट्रैक गुजरेगा।
व्यस्त रेलवे मार्ग के ऊपर तैयार हो रहा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना देश के परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली परियोजना है। गुजरात के वडोदरा में इसका लगभग 8.3 किलोमीटर लंबा हिस्सा घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र और मौजूदा रेलवे नेटवर्क के बीच से गुजरता है।
इस मार्ग पर भारतीय रेलवे की पांच लाइनें आती हैं, जिनमें दो मुख्य लाइनें भी शामिल हैं। इसके अलावा, बुलेट ट्रेन का प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस के व्यस्त रेल मार्ग को तिरछे कोण पर पार करता है। ऐसे स्थान पर निर्माण करना इंजीनियरों के लिए बड़ी चुनौती रहा है, क्योंकि निर्माण के दौरान नियमित रेल सेवाओं को सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए विशेष डिजाइन वाले पोर्टल बीम लगाए गए हैं। ये बीम आगे बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
14 पोर्टल बीम से मजबूत होगा निर्माण ढांचा
वडोदरा में लगाए गए 14 पोर्टल बीम में से 10 बीम वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन और विश्वामित्री रेलवे स्टेशन के बीच सूरत की दिशा में स्थित हैं। वहीं, चार बीम वडोदरा रेलवे स्टेशन और छायापुरी रेलवे स्टेशन के बीच अहमदाबाद की दिशा में लगाए गए हैं।
अगले चरण में इन बीम के ऊपर लगभग 40 मीटर लंबे कंपोजिट गर्डर लगाए जाएंगे। इसके बाद एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण का काम आगे बढ़ाया जा सकेगा। परियोजना के अन्य हिस्सों में स्पैन-बाय-स्पैन तकनीक का इस्तेमाल करके निर्माण किया जाएगा।
प्रत्येक बीम का वजन करीब 1,500 टन
इन पोर्टल बीम का निर्माण तकनीकी रूप से काफी जटिल रहा है। प्रत्येक बीम का वजन लगभग 1,500 टन है। इनकी लंबाई करीब 37 मीटर, ऊंचाई चार मीटर और चौड़ाई भी चार मीटर है।
एक बीम के निर्माण में लगभग 590 घन मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। इसके लोहे के ढांचे का वजन करीब 55 टन है। सीमित जगह और चालू रेलवे ट्रैक की मौजूदगी के कारण इनका निर्माण मौके पर ही कंक्रीट डालकर किया गया।
इस काम को पूरा करने के लिए भारी क्षमता वाली क्रेन, हाइड्रोलिक जैक और विशेष निर्माण उपकरणों की सहायता ली गई। इंजीनियरों के सामने बीम की मजबूती सुनिश्चित करने के साथ-साथ रेलवे परिचालन की सुरक्षा बनाए रखने की भी जिम्मेदारी थी।
अब आगे बढ़ेगा एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण
सभी 14 पोर्टल बीम का काम पूरा होने से बुलेट ट्रेन परियोजना के इस हिस्से में एक महत्वपूर्ण बाधा दूर हुई है। अब इनके ऊपर गर्डर लगाने और एलिवेटेड कॉरिडोर को आगे बढ़ाने का काम किया जा सकेगा।
इस परियोजना का उद्देश्य मुंबई और अहमदाबाद के बीच तेज गति वाली रेल सेवा विकसित करना है। हालांकि, वडोदरा में हासिल हुई यह उपलब्धि निर्माण कार्य के एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाती है, न कि पूरी परियोजना के पूरा होने को।
आने वाले समय में गर्डर लगाने और ट्रैक से जुड़े अन्य निर्माण कार्य पूरे होने के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस तरह वडोदरा में हुआ यह निर्माण कार्य देश की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए एक अहम कदम साबित हुआ है।

