23 Sep 2026, Wed

दूध की कीमतों में 10 रुपये तक की बढ़ोतरी की मांग, दुग्ध उत्पादक यूनियनों ने कर्नाटक सरकार से किया आग्रह

कर्नाटक में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग तेज हो गई है। राज्य की सहकारी दुग्ध उत्पादक यूनियनों ने नंदिनी दूध की खरीद और खुदरा कीमत में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की मांग सरकार के सामने रखी है। यूनियनों का कहना है कि पशु चारे, दवाओं और डेयरी फार्मिंग से जुड़ी दूसरी लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे दूध उत्पादन महंगा हो गया है।

मुख्यमंत्री से मिला दुग्ध यूनियनों का प्रतिनिधिमंडल

दूध की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर सहकारी दुग्ध उत्पादक यूनियनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विधान सौध में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उत्पादन लागत में हुई बढ़ोतरी का हवाला देते हुए दूध की खरीद कीमत और खुदरा कीमत दोनों में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि करने का आग्रह किया।

यूनियनों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर किसानों और दुग्ध उत्पादकों के लिए बढ़ती लागत का सामना करना मुश्किल हो रहा है। खासकर पशुओं के चारे और रखरखाव पर होने वाला खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।

सरकार ने मांगी पिछले 10 साल की जानकारी

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अधिकारियों को दूध की कीमतों से जुड़े विस्तृत आंकड़े जुटाने के निर्देश दिए हैं। इसमें पिछले 10 वर्षों के दौरान पशु चारे की कीमतों में हुई बढ़ोतरी, एक लीटर दूध के उत्पादन की लागत और अलग-अलग जिलों में दूध के उत्पादन तथा बिक्री से जुड़ी जानकारी शामिल है।

इसके अलावा यूनियनों द्वारा किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की मात्रा का भी ब्योरा मांगा गया है। पड़ोसी राज्यों में दूध की खरीद और खुदरा कीमतों की स्थिति की जानकारी भी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इन आंकड़ों के आधार पर कीमतों में बदलाव को लेकर आगे फैसला लिया जा सकता है।

चारे की बढ़ती कीमत से डेयरी किसानों पर दबाव

बेंगलुरु शहरी, ग्रामीण और रामनगर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक सोसायटी यूनियन लिमिटेड के चेयरमैन डी.के. सुरेश ने कहा कि पशु चारे, हरे चारे, दवाओं और पशुओं के रखरखाव से जुड़ी लागत में लगातार वृद्धि हुई है। इसके अलावा सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की आय पर भी असर पड़ा है।

चारे की उपलब्धता कम होने से डेयरी किसानों की लागत और बढ़ गई है। ऐसे में दुग्ध यूनियनें खरीद कीमत बढ़ाने की मांग कर रही हैं, ताकि किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले बेहतर भुगतान मिल सके।

डेढ़ साल से कीमत नहीं बढ़ने का दावा

डी.के. सुरेश के मुताबिक, कर्नाटक में पिछले करीब डेढ़ साल से दूध की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। उनका कहना है कि इस दौरान कई अन्य राज्यों में सहकारी संस्थाओं और निजी डेयरियों ने दूध तथा दूध से बने उत्पादों की कीमतों में बदलाव किया है।

हाल ही में मुंबई में भी दूध की थोक कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद वहां दूध की कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो गई। बढ़ती लागत को इस फैसले की प्रमुख वजह बताया गया था।

अब कर्नाटक में भी दूध की खरीद और खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की मांग सामने आने के बाद सरकार द्वारा जुटाए जा रहे आंकड़ों पर सबकी नजर है। अंतिम फैसला होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उपभोक्ताओं को दूध के लिए कितनी अतिरिक्त कीमत चुकानी होगी।

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