नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अब लोग पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की बजाय तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर रुख कर रहे हैं। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार की सख्त नीतियां, पुराने वाहनों पर कार्रवाई और इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में छह गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों, बेहतर चार्जिंग सुविधाओं और बाजार में बढ़ते विकल्पों के कारण भी लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
तीन साल में रिकॉर्ड वृद्धि
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दिल्ली में हर महीने औसतन 1,038 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण होता था। वहीं, वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर लगभग 7,000 प्रतिमाह तक पहुंच गई है। इसका अर्थ है कि महज तीन वर्षों में राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री छह गुना से भी अधिक बढ़ गई है।
यह तेजी न केवल लोगों की बदलती पसंद को दर्शाती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी संकेत देती है।
सरकार की सख्त नीतियों का असर
दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू की गई सख्त नीतियों का सीधा प्रभाव वाहन बाजार पर दिखाई दे रहा है।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पहले से ही 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लागू है। इसके अलावा, पिछले वर्ष प्रशासन ने ऐसे वाहनों के खिलाफ जब्ती अभियान भी शुरू किया था।
इसी तरह, वायु गुणवत्ता खराब होने पर लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दौरान डीजल वाहनों के प्रवेश पर भी कई बार प्रतिबंध लगाया जाता है। इन नियमों के चलते लोगों ने वैकल्पिक परिवहन के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना शुरू कर दिया है।
बाजार में बढ़े विकल्प
कुछ वर्ष पहले तक भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकल्प सीमित थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। देश की लगभग सभी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने इलेक्ट्रिक मॉडल बाजार में उतार चुकी हैं।
छोटी कारों से लेकर प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट तक, उपभोक्ताओं के पास अब कई विकल्प उपलब्ध हैं। इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक और कारों की बढ़ती रेंज ने ग्राहकों के लिए अपनी जरूरत और बजट के अनुसार वाहन चुनना आसान बना दिया है।
ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में और अधिक कंपनियां इलेक्ट्रिक सेगमेंट में प्रवेश करेंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतों में भी संतुलन आने की संभावना है।
पर्यावरण और जेब दोनों के लिए फायदेमंद
इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरण के अनुकूल माने जाते हैं क्योंकि इनमें प्रदूषण उत्सर्जन नगण्य होता है। दिल्ली जैसे शहर, जहां वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है, वहां EV का बढ़ता उपयोग प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो रहे हैं। पारंपरिक ईंधन की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की संचालन लागत काफी कम होती है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा विस्तार
दिल्ली सरकार लगातार सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने पर भी काम कर रही है। राजधानी में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से लोगों की रेंज एंग्जायटी कम हुई है और EV अपनाने का विश्वास बढ़ा है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकारी प्रोत्साहन, बेहतर तकनीक और बढ़ते चार्जिंग नेटवर्क के कारण आने वाले वर्षों में दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और तेजी से बढ़ेगी।
राजधानी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रही है और यह बदलाव भविष्य में दिल्ली को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

