21 May 2026, Thu

दिल्ली में हीट स्ट्रोक का पहला मामला, 105 डिग्री था बुखार; बेहोशी की हालत में पहुंचा RML

देश की राजधानी दिल्ली इस समय भीषण गर्मी और हीट वेव की चपेट में है। तापमान लगातार खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है और इसी बीच दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में इस सीजन का पहला गंभीर हीट स्ट्रोक का मामला सामने आया है। 24 वर्षीय एक छात्र को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज स्पेशल हीट स्ट्रोक यूनिट में चल रहा है।

मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए अगले पांच दिनों तक हीट वेव का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऐसे में डॉक्टरों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।


ट्रेन यात्रा के दौरान बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल का रहने वाला 24 वर्षीय छात्र ट्रेन से दिल्ली आ रहा था। यात्रा के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसे तेज बुखार आया और धीरे-धीरे उसका मानसिक संतुलन भी बिगड़ गया।

बताया जा रहा है कि युवक ने यात्रा के दौरान होश खो दिया था। प्राथमिक उपचार के बाद उसे दिल्ली सरकार के एक अस्पताल से गंभीर हालत में RML अस्पताल रेफर किया गया।


डॉक्टरों को पहले स्ट्रोक का हुआ शक

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों को शुरुआत में यह मामला स्ट्रोक या पैरालिसिस जैसी स्थिति का लगा। मरीज की हालत बेहद गंभीर थी और उसका GCS (Glasgow Coma Scale) स्कोर न्यूनतम स्तर E1V1M1 तक पहुंच चुका था, जो गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति को दर्शाता है।

हालांकि बाद में सीटी स्कैन और अन्य मेडिकल जांच सामान्य आने पर डॉक्टरों ने तुरंत पहचान लिया कि मरीज गंभीर हीट स्ट्रोक का शिकार हुआ है।


तुरंत वेंटिलेटर पर किया गया शिफ्ट

मरीज की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देरी किए उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। इसके बाद उसे RML अस्पताल की विशेष हीट स्ट्रोक यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया, जहां लगातार निगरानी में उसका इलाज जारी है।

डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर इलाज शुरू होने से मरीज की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली।


कूलिंग थेरेपी से बचाई गई जान

हीट स्ट्रोक के मामलों में शरीर का तापमान तेजी से कम करना सबसे जरूरी माना जाता है। RML अस्पताल की मेडिकल टीम ने मरीज को विशेष कूलिंग थेरेपी दी।

इलाज के दौरान:

  • मरीज को ठंडे पानी में रखा गया
  • शरीर पर बर्फ की पट्टियां लगाई गईं
  • ठंडी सलाइन चढ़ाई गई
  • बगल और कमर के हिस्सों में बर्फ रखी गई

इन उपायों की मदद से मरीज के शरीर का तापमान 105°F से घटाकर 102°F तक लाया गया।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि शुरुआती टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट नेगेटिव आई है, यानी मरीज के शरीर में किसी नशीले पदार्थ या जहर के संकेत नहीं मिले हैं।


डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है और समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।

डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर के समय धूप में बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और लंबे समय तक यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।


दिल्ली में बढ़ रही गर्मी की मार

दिल्ली में लगातार बढ़ते तापमान और लू के कारण अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है।


निष्कर्ष

दिल्ली में सामने आया यह पहला गंभीर हीट स्ट्रोक केस इस बात का संकेत है कि भीषण गर्मी अब स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। समय पर इलाज और डॉक्टरों की सतर्कता से छात्र की जान बचाने की कोशिश जारी है, लेकिन यह घटना लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है कि गर्मी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

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