13 Oct 2026, Tue

दिल्ली में मेट्रो बंद करने और आदेश का पालन नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, अधिकारियों के खिलाफ नोटिस

नई दिल्ली: दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं और लोगों की आवाजाही को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस मामले में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस दाखिल किया गया है। अदालत यह सुनवाई करेगी कि क्या संबंधित अधिकारियों ने पहले जारी किए गए निर्देशों का पालन किया था या नहीं।

इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की चेयरपर्सन डी. थारा का नाम सामने आया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

अदालत ने पहले क्या निर्देश दिए थे?

सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को दिए गए अपने आदेश में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं और आम लोगों की आवाजाही को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं करने पर जोर दिया था। अदालत ने कहा था कि मेट्रो और रेल सेवाओं को अचानक बंद करने जैसे कदमों से लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। कानून के अनुसार सेवाएं सामान्य रूप से जारी रखने की बात भी कही गई थी।

इसके अलावा, दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के संबंध में कानूनी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में यह भी कहा गया था कि जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू नहीं है, वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से बचा जाए।

अब अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि प्रदर्शन के दौरान इन निर्देशों का किस हद तक पालन किया गया और अधिकारियों की भूमिका क्या रही। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।

वकीलों की परेशानी का मुद्दा भी उठेगा

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को वकीलों की ओर से दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई होने की संभावना है। इनमें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका शामिल है। इन याचिकाओं में प्रदर्शन के कारण वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और मुकदमों से जुड़े लोगों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया गया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस संबंध में कहा था कि लोकतांत्रिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलनी चाहिए, लेकिन अदालत के कामकाज और न्यायिक संस्थानों तक पहुंचने वाले लोगों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए। इस मामले में वकीलों ने कथित बल प्रयोग और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन

दिल्ली में ये विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर जा रहे कुछ वकीलों के साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किए जाने का मुद्दा भी सामने आया था।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस घटना पर चिंता जताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की अपील की थी। एसोसिएशन का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों को हुई परेशानी और न्यायिक कामकाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान दिया जाना जरूरी है।

मंगलवार की सुनवाई में सार्वजनिक परिवहन, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, अधिकारियों की जवाबदेही और न्यायिक संस्थानों तक निर्बाध पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, अवमानना की कार्यवाही शुरू होगी या नहीं, इस बारे में अंतिम निर्णय अदालत सुनवाई के बाद ही करेगी।

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