13 Aug 2026, Thu

दिल्ली में बनेंगे 20 लाख नए फ्लैट, 100 से ज्यादा गांव होंगे विकसित; मास्टर प्लान 2047 को मिली मंजूरी

राजधानी दिल्ली के विकास को नई दिशा देने वाला मास्टर प्लान 2047 अब एक अहम पड़ाव पार कर चुका है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की बोर्ड बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस मास्टर प्लान के लागू होने के बाद दिल्ली में करीब 20 लाख नए फ्लैट बनाए जाने की संभावना है। इसके साथ ही पुराने DDA फ्लैटों के पुनर्विकास, गांवों की जमीन के योजनाबद्ध विकास और शहर में हरित क्षेत्रों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है।

यह योजना दिल्ली की बढ़ती आबादी, आवास की मांग और भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। DDA का मानना है कि मास्टर प्लान 2047 आने वाले वर्षों में राजधानी के आवास, परिवहन, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव का आधार बनेगा।

105 गांवों की जमीन का होगा योजनाबद्ध विकास

मास्टर प्लान के तहत दिल्ली के 105 गांवों की जमीन को लैंड पूलिंग नीति के जरिए विकसित किया जाएगा। इन क्षेत्रों में आधुनिक टाउन प्लानिंग के आधार पर आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

इसके अलावा करीब 69 गांवों को ग्रीन डेवलपमेंट एरिया (GDA) नीति के तहत विकसित करने की योजना है। इन इलाकों में हरित क्षेत्रों के साथ नए आवासीय और व्यावसायिक हब बनाए जा सकते हैं। इससे दिल्ली में बड़े पैमाने पर नए घरों के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध होगी और भविष्य में आवास की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

पुराने DDA फ्लैटों का होगा पुनर्विकास

दिल्ली में DDA के करीब चार लाख फ्लैट 50 वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं। मास्टर प्लान 2047 के तहत इन पुरानी दो मंजिला इमारतों और फ्लैटों के पुनर्निर्माण और पुनर्विकास का रास्ता साफ होगा।

इस योजना से 30 से 40 लाख लोगों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक आवास मिलने की उम्मीद है। हालांकि पुनर्विकास के दौरान भवन उपनियम, पार्किंग व्यवस्था, इमारतों की ऊंचाई, अग्नि सुरक्षा मानकों और संरचनात्मक मजबूती जैसे सभी नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

UER-2 के आसपास बनेंगी हाईराइज इमारतें

मास्टर प्लान 2047 में राजधानी में हाईराइज बिल्डिंग के निर्माण का भी प्रावधान किया गया है। अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) के आसपास 250 मीटर के दायरे में ऊंची इमारतों के विकास की योजना बनाई गई है।

UER-2 अलीपुर से शुरू होकर बवाना, रोहिणी, नजफगढ़ और द्वारका होते हुए महिपालपुर तक जाता है। इस कॉरिडोर के विकास से दिल्ली के बाहरी इलाकों में आधुनिक शहरी ढांचा विकसित होने और बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।

पार्क, झील और ग्रीन एरिया पर रहेगा फोकस

मास्टर प्लान 2047 केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें दिल्ली को अधिक हरित और रहने योग्य शहर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

योजना के तहत पार्कों, झीलों और जल निकायों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर काम किया जाएगा। इसके अलावा बायोडायवर्सिटी पार्क, बाढ़ के मैदानों का वैज्ञानिक प्रबंधन और नालों के आसपास बफर जोन में पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक विकसित करने का प्रस्ताव भी शामिल है।

केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद होगा लागू

DDA बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद मास्टर प्लान 2047 को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय की मंजूरी के बाद यह योजना औपचारिक रूप से लागू होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो दिल्ली में आवास की उपलब्धता बढ़ेगी, पुराने इलाकों का पुनर्विकास तेज होगा और राजधानी का शहरी विकास अधिक संगठित, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल दिशा में आगे बढ़ेगा।

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