होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव: अमेरिका-ईरान आमने-सामने, ट्रंप के आदेश से हालात और गंभीर
दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। भले ही दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से सीजफायर की स्थिति बनी हुई है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को आदेश दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की छोटी नावों पर गोली चलाकर उन्हें नष्ट किया जाए। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे भड़काऊ बयान करार दिया है।
ईरान का जवाब: “हम सब एक हैं”
ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर लगभग समान बयान जारी किए। उन्होंने कहा कि ईरान के भीतर किसी तरह का वैचारिक विभाजन नहीं है। उनके मुताबिक, “ईरान में कोई कट्टरपंथी या नरमपंथी नहीं है, हम सभी ईरानी और क्रांतिकारी हैं।” इस बयान को देश के भीतर एकता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यहां से होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई देशों में तेल और ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता का माहौल बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ा तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ेगा और कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
ईरान में सत्ता को लेकर अनिश्चितता
ईरान के भीतर नेतृत्व को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी को हुए संघर्ष के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद देश की सत्ता संरचना को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, ईरान सरकार ने इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
नए सुप्रीम लीडर माने जा रहे मुज्तबा खामेनेई भी अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। वे केवल सरकारी टेलीविजन के माध्यम से संदेश जारी कर रहे हैं, जिससे ईरान की राजनीतिक स्थिति को लेकर और अधिक अनिश्चितता बनी हुई है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
फिलहाल दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या तनाव और अधिक बढ़ता है।

