तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ईरान यात्रा चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एक कड़ा संदेश लेकर तेहरान पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान ईरान के सुरक्षा परिषद से जुड़े वरिष्ठ नेता मोहसेन रेजाई ने अमेरिका की मांगों पर सख्त रुख अपनाया। दोनों के बीच हुई मुलाकात के बारे में सामने आए दावों ने क्षेत्रीय कूटनीति और संभावित बातचीत को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की मांग
रिपोर्टों के अनुसार, मुनीर ने ईरानी नेतृत्व के सामने अमेरिका की ओर से परमाणु कार्यक्रम को लेकर अधिक लचीलापन दिखाने की मांग रखी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक रियायतें दे और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाले।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ उसके तनाव का प्रमुख कारण रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंता जताई जाती रही है, जबकि तेहरान अपने परमाणु अधिकारों और राष्ट्रीय हितों पर जोर देता रहा है।
मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि अमेरिकी मांगें नहीं माने जाने पर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बड़े हमले की आशंका का संदेश दिया गया। हालांकि, इस कथित अल्टीमेटम और बातचीत के पूरे विवरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
मोहसेन रेजाई ने अपनाया सख्त रुख
ईरान में हुई मुलाकात को लेकर सामने आए विवरणों के मुताबिक, मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी मांगों के प्रति असहमति जताई। बताया गया कि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संवर्धित परमाणु सामग्री को देश से बाहर भेजने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ईरान बातचीत आगे बढ़ाने से पहले अपनी सात शर्तों को पूरा किए जाने पर जोर दे रहा है। तेहरान का रुख यह बताया गया कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को पहले भरोसा कायम करने और ईरान की चिंताओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
मुलाकात से जुड़े वीडियो को लेकर भी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज को औपचारिक और तनावपूर्ण बताया। हालांकि, केवल वीडियो में दिखाई देने वाले हावभाव के आधार पर बातचीत के वास्तविक माहौल या उसके नतीजे के बारे में निर्णायक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
ईरानी नेतृत्व से भी मिले पाकिस्तानी सेना प्रमुख
यात्रा के दौरान आसिम मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ से भी मुलाकात की। इन बैठकों को क्षेत्रीय हालात और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान की भूमिका इस संदर्भ में अहम हो सकती है, क्योंकि वह दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने और बातचीत के रास्ते खुले रखने में योगदान दे सकता है। हालांकि, किसी मध्यस्थ की कोशिश तभी प्रभावी हो सकती है, जब संबंधित पक्ष बातचीत के लिए तैयार हों।
आगे क्या होगा?
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी संभावित समझौते का रास्ता फिलहाल चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है। एक ओर अमेरिका परमाणु गतिविधियों पर सख्त शर्तें चाहता है, वहीं ईरान अपनी शर्तों और संप्रभुता पर जोर दे रहा है।
आसिम मुनीर की यात्रा से जुड़े दावों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष कूटनीतिक बातचीत की दिशा में आगे बढ़ेंगे या तनाव और गहरा होगा। फिलहाल, मुलाकात के कथित अल्टीमेटम और उससे जुड़े कई विवरणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

