सूर्यकुमार यादव का ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर हरभजन सिंह ने कीर्ति आजाद को दिया तीखा जवाब
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भारतीय क्रिकेट टीम ने 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को 96 रनों से मात देते हुए तीसरी बार यह खिताब अपने नाम किया। इस जीत के बाद टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद स्थित हनुमान मंदिर पहुंचकर अपनी आस्था दिखाई। इस घटना को लेकर पूर्व भारतीय खिलाड़ी और मौजूदा टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाए थे।
कीर्ति आजाद, जो 1983 में कपिल देव की कप्तानी में भारत के पहले वनडे वर्ल्ड कप विजेता स्क्वाड का हिस्सा रहे थे, का कहना था कि क्रिकेट और धर्म अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने कहा कि “भारतीय टीम में कई धर्मों के खिलाड़ी होते हैं और सभी मिलकर टीम को जीत दिलाते हैं। खिलाड़ी और खेल का कोई धर्म नहीं होता, वह सिर्फ अपनी टीम के लिए खेलते हैं। अगर ट्रॉफी को किसी धर्म विशेष से जोड़ेंगे, तो भारत और पाकिस्तान में क्या फर्क रह जाएगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि खेल को धर्म के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
इस बयान के बाद भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने कीर्ति आजाद के तर्क पर तीखा जवाब दिया। भज्जी ने कहा कि “आपकी बातें मत सुनिए। खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए। आपकी आस्था है तो आप मंदिर जाइए, गुरुद्वारे जाइए या कहीं भी जाइए। अगर सूर्या ट्रॉफी लेकर कहीं गए भी हैं, यह उनकी इच्छा थी। यह सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर की इच्छा है कि वह कहीं भी जाएं और इस पर कोई बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। अगर उन्होंने मन्नत मांगी है, तो वह कहीं भी जा सकते हैं। इस पर सवाल खड़े नहीं किए जाने चाहिए।”
हरभजन सिंह के इस बयान से साफ है कि टीम इंडिया के खिलाड़ियों के व्यक्तिगत आस्था और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खेल और धर्म को जोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और खिलाड़ियों को उनकी निजी आस्था के अनुसार निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
सूर्यकुमार यादव की यह पहल उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा को दर्शाती है और टीम के लिए किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं करती। भारतीय क्रिकेट फैंस ने भी सोशल मीडिया पर इसे सम्मान की दृष्टि से देखा। वहीं कीर्ति आजाद का बयान एक तरह की चिंता को दर्शाता है कि खेल और धर्म का मिश्रण न हो।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 की यह जीत न केवल खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह देशवासियों के लिए भी गर्व का क्षण है। हरभजन सिंह का जवाब इस बात को दोहराता है कि खिलाड़ी अपनी आस्था के अनुसार निर्णय ले सकते हैं और इस पर सार्वजनिक आलोचना नहीं होनी चाहिए।

