22 Mar 2026, Sun

जापान के पूर्व PM शिंजो आबे की हत्या करने वाले शख्स को हुई उम्रकैद की सजा, चुनाव प्रचार के दौरान हुआ था हमला

जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की हत्या का आरोपी तेत्सुया यामागामी उम्रकैद की सजा

टोक्यो: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी तेत्सुया यामागामी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस खबर की पुष्टि नारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और जापानी मीडिया NHK ने की है। तेत्सुया यामागामी ने जुलाई 2022 में नारा शहर में चुनाव प्रचार के दौरान आबे पर जानलेवा हमला किया था।

यामागामी ने अपने जुर्म को स्वीकार कर लिया था और अदालत ने अभियोजकों की सिफारिश के अनुसार उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। 45 साल के यामागामी ने शिंजो आबे की नीतियों से असंतुष्ट होने के चलते यह घातक कदम उठाया था।

घटना के समय शिंजो आबे नारा में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। अचानक पीछे से उस पर गोली चलाई गई। गोली लगने के बाद उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद यामागामी को गिरफ्तार कर लिया गया था।

शिंजो आबे जापान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते थे। उनका जन्म 1954 में हुआ था। उनके परिवार का राजनीति से गहरा संबंध रहा है। उनके पिता शिंतारो आबे जापान के विदेश मंत्री रह चुके हैं और उनके दादा नोबुसुके किशी भी जापान के प्रधानमंत्री रह चुके थे।

शिंजो आबे पहली बार 2006 में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने कुछ ही समय में इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह 2012 से 2020 तक दोबारा प्रधानमंत्री बने और जापान की राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस हत्या ने न केवल जापान बल्कि पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी थी। शिंजो आबे की नीतियों और उनके नेतृत्व के कारण उन्हें वैश्विक स्तर पर सम्मान मिला था। उनका निधन जापान के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में एक गहरी चोट के रूप में देखा गया।

अब यामागामी को नारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जो जापानी कानून के तहत हत्या के मामलों में दी जाने वाली सबसे कठोर सजा है। अदालत का कहना है कि यामागामी ने अपने कार्य में किसी प्रकार की पछतावा या अपराध से बचने का प्रयास नहीं किया।

इस फैसले के बाद जापान में न्याय प्रणाली की ताकत और कानून के पालन की प्रतिबद्धता को भी लेकर बहस शुरू हो गई है। शिंजो आबे की हत्या के मामले ने देश में सुरक्षा और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे को भी उजागर किया है।

 

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