11 Mar 2026, Wed

जापान का ये कानून जो दुनिया में कहीं नहीं, लेकिन अब पति-पत्नी रख सकेंगे अलग-अलग सरनेम

जापान में शादी के बाद एक ही सरनेम रखने का 125 साल पुराना कानून, अब बदलाव की मांग तेज 🇯🇵

दुनिया के कई देशों में शादी के बाद पति-पत्नी अपने नाम को लेकर अलग-अलग विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन Japan में लंबे समय से एक ऐसा कानून लागू है जो शादी के बाद दंपति को एक ही सरनेम अपनाने के लिए बाध्य करता है। यह नियम लगभग 125 साल पुराना है और अब इसके खिलाफ देश में विरोध तेज हो गया है।

1898 के सिविल कोड से शुरू हुई परंपरा

जापान में यह नियम 1898 में लागू किए गए Japanese Civil Code का हिस्सा है। इस कानून के अनुसार शादी के बाद पति और पत्नी को कानूनी तौर पर एक ही पारिवारिक नाम यानी सरनेम अपनाना अनिवार्य होता है।

कानून में यह नहीं कहा गया कि सिर्फ पत्नी ही अपना नाम बदलेगी। पति या पत्नी, दोनों में से कोई भी अपना सरनेम बदल सकता है। हालांकि जापान के पारंपरिक समाज में लगभग 95% मामलों में महिलाएं ही अपना मायके का नाम छोड़कर पति का सरनेम अपनाती हैं।

करियर और पहचान को लेकर बढ़ा विरोध

पिछले कुछ वर्षों में इस कानून के खिलाफ जापान में बड़े पैमाने पर विरोध देखने को मिला है। खासकर कामकाजी महिलाओं और पेशेवर वर्ग का कहना है कि शादी के बाद नाम बदलने से उनकी पहचान और करियर पर असर पड़ता है।

कई महिलाओं का तर्क है कि उनका प्रोफेशनल नाम, डिग्री, रिसर्च पेपर और पासपोर्ट जैसे दस्तावेज अलग-अलग नाम होने के कारण जटिल हो जाते हैं। यही वजह है कि समाज के कई वर्ग अब इस नियम में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

जापान में एक अनोखा नियम

दुनिया के विकसित देशों में जापान को एक ऐसा देश माना जाता है जहां शादी के बाद एक ही सरनेम रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है। अगर कोई जोड़ा अलग-अलग नाम रखना चाहता है तो उसे कानूनी तौर पर शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं मिल सकता।

यही कारण है कि यह कानून अब मानवाधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ी बहस का विषय बन चुका है।

भविष्य में सभी का एक ही सरनेम?

हाल ही में जापान के एक प्रोफेसर ने चेतावनी दी कि अगर यह नियम लंबे समय तक जारी रहा तो कई छोटे-छोटे पारिवारिक नाम धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर यही स्थिति जारी रही तो साल 2531 तक देश के ज्यादातर लोगों का सरनेम “सातो” हो सकता है, जो जापान में सबसे आम उपनामों में से एक माना जाता है।

नया विकल्प तलाश रही सरकार

बढ़ते विरोध के बाद जापान सरकार अब “Selective Surname System” यानी वैकल्पिक उपनाम प्रणाली पर विचार कर रही है। इस व्यवस्था के तहत शादी करने वाले जोड़ों को यह विकल्प मिल सकता है कि वे एक ही नाम रखें या अपनी पुरानी पहचान बनाए रखें।

इस मुद्दे पर कई बार Supreme Court of Japan में भी बहस हो चुकी है। हालांकि अदालत ने अभी इस कानून को पूरी तरह खत्म नहीं किया है, लेकिन सरकार को इसमें बदलाव पर विचार करने की सलाह दी है।

फिलहाल सरकार एक बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार सरकारी दस्तावेजों में भले ही एक सरनेम हो, लेकिन महिलाएं अपने ऑफिस, बैंक और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों में शादी से पहले का नाम यानी मैडेन नेम इस्तेमाल कर सकती हैं।

इस मुद्दे पर जापान में बहस अभी जारी है और आने वाले समय में इस ऐतिहासिक कानून में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *