23 Apr 2026, Thu

‘ज़ीरो सिविक सेंस’ का एक और नमूना! उद्यमी ने शेयर की सहयात्री की करतूत, देखकर यूजर्स भी भड़के

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वायरल पोस्ट ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह मामला किसी बड़े विवाद या सनसनीखेज घटना से जुड़ा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों और ‘सिविक सेंस’ की कमी को उजागर करता है। खास बात यह है कि यह घटना एक फ्लाइट के अंदर की है, जहां अनुशासन और साफ-सफाई की उम्मीद सबसे ज्यादा की जाती है।

यह पोस्ट X (पूर्व में ट्विटर) पर @theswapnilsri नाम के हैंडल से शेयर की गई, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। पोस्ट में एक उद्यमी ने अपने फ्लाइट अनुभव को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक पढ़ा-लिखा और सलीके से दिखने वाला यात्री भी बुनियादी नागरिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।

पोस्ट के अनुसार, उद्यमी एक ऐसे सहयात्री के बगल में बैठे थे, जिसने नाश्ता खत्म करने के बाद अपने कचरे को डस्टबिन में डालने के बजाय सामने वाली सीट के नीचे फर्श पर रख दिया। यह कोई गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया काम था। हैरानी की बात यह रही कि जब केबिन क्रू कचरा इकट्ठा करने आया, तो उसने ट्रे टेबल और हाथों में मौजूद कचरा तो उठा लिया, लेकिन सीट के नीचे रखा कचरा नजरअंदाज हो गया और फ्लाइट लैंड होने तक वहीं पड़ा रहा।

इस घटना को साझा करते हुए उद्यमी ने ‘यह मेरी समस्या नहीं है’ वाली मानसिकता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि यह सिर्फ जागरूकता की कमी नहीं, बल्कि एक गहरी सोच की समस्या है, जहां लोग यह मान लेते हैं कि सार्वजनिक स्थानों की सफाई उनकी जिम्मेदारी नहीं है। उनके अनुसार, “लोग सोचते हैं कि सफाई के लिए किसी को वेतन मिलता है, तो वही इसका ध्यान रखेगा। मैं तो बस यहां से गुजर रहा हूं।”

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई और हजारों लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस तरह की घटनाएं सिर्फ फ्लाइट ही नहीं, बल्कि ट्रेन, बस, सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर भी आम हैं।

एक यूजर ने लिखा कि उसने एक पढ़े-लिखे व्यक्ति को सड़क पर थूकते देखा, और जब उसे टोका गया तो उसने उल्टा सवाल किया कि “क्या यह सड़क उसके पिता की है?” वहीं, एक अन्य यूजर ने ट्रेन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक मां ने अपनी बच्ची को कूड़ेदान में कचरा डालने से रोककर सीधे पटरियों पर फेंकने के लिए कहा, यह कहते हुए कि सफाईकर्मियों का काम ही यही है।

कुछ यूजर्स ने इस समस्या को शिक्षा प्रणाली से भी जोड़ा। उनका कहना था कि आजकल शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करना रह गया है, जबकि नागरिक जिम्मेदारी जैसे मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं।

यह वायरल पोस्ट एक बड़े सामाजिक मुद्दे की ओर इशारा करती है। साफ-सफाई और सिविक सेंस सिर्फ सरकारी नियमों या सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। छोटे-छोटे कदम, जैसे कचरा सही जगह पर डालना, सार्वजनिक स्थानों का सम्मान करना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना—समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह घटना एक आईना है, जो हमें हमारी आदतों और सोच पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर करती है।

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