5 Aug 2026, Wed

जब बॉलीवुड में चमचमाता करियर छोड़ साउथ चले गए प्रदीप रावत, कहा था- ‘बिना मांगे, तीन गुना पैसा मिलता है’

हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा के जाने-माने अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले करीब पांच वर्षों से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे और मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रदीप रावत ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए और खासतौर पर अपने दमदार खलनायक किरदारों के लिए दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई।

प्रदीप रावत को आमिर खान की सुपरहिट फिल्मों ‘लगान’ और ‘गजनी’ में निभाए गए किरदारों के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। ‘गजनी’ में उनके खलनायक अवतार ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी थी। हाल के वर्षों में वह विक्की कौशल स्टारर ‘छावा’ को लेकर भी चर्चा में रहे थे।

बॉलीवुड से लेकर साउथ तक बनाई पहचान

प्रदीप रावत ने हिंदी फिल्मों के अलावा तेलुगु, तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्मों में भी व्यापक स्तर पर काम किया। साउथ सिनेमा में उन्हें एक बेहद प्रभावशाली विलेन के रूप में देखा जाता था। उन्होंने ‘भद्रा’, ‘रिबेल’ और कई अन्य सफल फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।

साल 2004 में रिलीज हुई एस.एस. राजामौली की फिल्म ‘स्ये’ में उनके द्वारा निभाया गया ‘भिक्षु यादव’ का किरदार आज भी याद किया जाता है। इस भूमिका के लिए उन्हें काफी प्रशंसा मिली और उन्हें पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इसी फिल्म के बाद दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।

क्यों किया साउथ इंडस्ट्री का रुख?

कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में प्रदीप रावत ने बताया था कि उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों में अधिक काम करना क्यों चुना। उन्होंने कहा था कि साउथ इंडस्ट्री में कलाकारों को बॉलीवुड की तुलना में बेहतर सम्मान और बेहतर पारिश्रमिक मिलता है।

उन्होंने कहा था, “अगर मुंबई में किसी प्रोजेक्ट के लिए 100 रुपये मिलते हैं तो साउथ में 300 रुपये मिलते हैं। वहां फीस का अंतर काफी बड़ा है। अगर यहां एक लाख रुपये मिलते हैं तो साउथ में तीन लाख रुपये तक मिल सकते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा था कि दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों को भुगतान के लिए बार-बार याद नहीं दिलाना पड़ता, जबकि मुंबई में कई बार पेमेंट के लिए लगातार फॉलो-अप करना पड़ता है।

‘छावा’ के अनुभव का भी किया था जिक्र

प्रदीप रावत ने अपने इंटरव्यू में यह भी बताया था कि ‘छावा’ के दौरान उन्हें निर्माताओं से भुगतान को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा था कि उन्हें पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ी और उनका अनुभव सकारात्मक रहा।

अभिनय की दुनिया में छोड़ी अमिट छाप

प्रदीप रावत ने फिल्मों के अलावा टेलीविजन धारावाहिकों में भी काम किया। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, गहरी आवाज और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने उन्हें खलनायक की भूमिकाओं के लिए एक मजबूत विकल्प बनाया। उन्होंने कई दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहकर अपनी अलग पहचान बनाई।

उनके निधन पर फिल्म जगत की कई हस्तियों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धांजलि दी है। दर्शकों का कहना है कि प्रदीप रावत जैसे कलाकार बहुत कम होते हैं, जो हर किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ जाते हैं।

प्रदीप रावत का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके निभाए गए किरदार और फिल्मों में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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