उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट Noida International Airport से सोमवार को कमर्शियल उड़ानों की शुरुआत हो गई। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना के शुरू होने के साथ ही क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहले ही दिन एयरपोर्ट पर यात्रियों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
उद्घाटन के मौके पर सुबह सबसे पहले लखनऊ से इंडिगो की फ्लाइट जेवर एयरपोर्ट पर उतरी। विमान के लैंड करने पर उसका पारंपरिक वाटर सैल्यूट से स्वागत किया गया। इसके कुछ ही समय बाद जेवर से लखनऊ के लिए वापसी उड़ान ने टेकऑफ किया, जो इस एयरपोर्ट की व्यावसायिक सेवाओं की औपचारिक शुरुआत का संकेत बना।
इस विशेष उड़ान की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें 172 किसान सवार थे, जिन्होंने इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए अपनी जमीन दी थी। यह विमान इन किसानों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow पहुंचा, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से कराई गई।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने लखनऊ में इन किसानों से मुलाकात की और उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने जेवर एयरपोर्ट की पूरी विकास यात्रा का भी जिक्र किया और बताया कि किस तरह शुरुआती चरण में भूमि अधिग्रहण को लेकर चुनौतियां आई थीं।
सीएम योगी ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट का सपना लगभग 25 साल पुराना था, जिसे धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि कैबिनेट से प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रशासन को तय समय में भूमि अधिग्रहण शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन शुरुआती स्तर पर प्रगति धीमी रही। बाद में किसानों के साथ संवाद स्थापित कर परियोजना को आगे बढ़ाया गया।
इस परियोजना के लिए करीब 13 हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण चरणबद्ध तरीके से किया गया है। सरकार का दावा है कि यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-एनसीआर की हवाई क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
एयरपोर्ट के संचालन से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को तेजी मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के प्रमुख एविएशन हब के रूप में विकसित हो सकता है।
पहले दिन की उड़ानों के साथ ही जेवर एयरपोर्ट ने औपचारिक रूप से अपनी व्यावसायिक यात्रा शुरू कर दी है, जिसे राज्य सरकार एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देख रही है।

