13 Apr 2026, Mon

जब आशा भोसले ने 3 घंटे लगातार खड़े रहकर रिकॉर्ड किया गाना, एक पल भी बैठने का नहीं मौका, सुदीप बनर्जी ने किया खुलासा

मशहूर गजल गायक Sudeep Banerji ने महान गायिका Asha Bhosle को याद करते हुए उनके साथ बिताए आखिरी पलों को साझा किया है। आशा भोसले के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है, और संगीत जगत ने एक ऐसी आवाज खो दी है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। इसी बीच, सुदीप बनर्जी ने उनके साथ हुई हालिया रिकॉर्डिंग से जुड़ी यादों को साझा करते हुए भावुक हो गए।

एक इंटरव्यू में सुदीप बनर्जी ने बताया कि कुछ ही महीने पहले उन्हें आशा भोसले के साथ एक गाना रिकॉर्ड करने का मौका मिला था। उन्होंने कहा कि इतने बड़े कद की कलाकार होने के बावजूद आशा जी का व्यवहार बेहद विनम्र और सहयोगी था। वह संगीत निर्देशक और टीम के हर सदस्य को पूरा सम्मान देती थीं, जो आज के दौर में कम देखने को मिलता है।

सुदीप ने बताया कि आशा भोसले का काम करने का तरीका बेहद पारंपरिक और समर्पित था। वह गाने की रिकॉर्डिंग से पहले कलाकारों को अपने घर बुलाती थीं और घंटों बैठकर गीत के बोल, धुन और उसकी बारीकियों पर चर्चा करती थीं। उनके अनुसार, आज के समय में जहां कई गायक डिजिटल माध्यमों पर निर्भर रहते हैं, वहीं आशा भोसले टीम के साथ बैठकर गाने को पूरी तरह समझना और उसे बेहतर बनाना पसंद करती थीं।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने आशा भोसले के साथ काम किया। इससे पहले भी वह उनके साथ काम कर चुके थे, लेकिन हर बार उनका अनुभव अलग और प्रेरणादायक रहा। सुदीप के मुताबिक, जब उन्होंने पहली बार उनके साथ काम किया था, तब उनकी उम्र करीब 80 साल थी, और हाल ही में हुई रिकॉर्डिंग के समय वह 90 के पार थीं। इसके बावजूद उनकी ऊर्जा और काम के प्रति जुनून में कोई कमी नहीं आई थी।

सुदीप बनर्जी ने एक खास घटना का जिक्र करते हुए बताया कि रिकॉर्डिंग के दिन आशा भोसले ने करीब तीन घंटे तक लगातार खड़े होकर गाना रिकॉर्ड किया। उन्होंने कहा कि इस उम्र में जहां लोग सामान्य रूप से चलने-फिरने में भी कठिनाई महसूस करते हैं, वहीं आशा जी ने बिना किसी सहारे के इतनी लंबी रिकॉर्डिंग पूरी की, जो उनके समर्पण और पेशेवर रवैये को दर्शाता है।

इसके अलावा, उन्होंने आशा भोसले के व्यक्तिगत स्वभाव के बारे में भी बात की। सुदीप ने बताया कि आशा जी को खाना बनाने का बहुत शौक था और वह अपने मेहमानों को खुद खाना खिलाना पसंद करती थीं। चूंकि सुदीप बंगाली हैं, इसलिए आशा भोसले उनसे बांग्ला भाषा में बातचीत करती थीं, जिससे उनके बीच एक खास जुड़ाव बन गया था।

सुदीप बनर्जी के अनुसार, स्टूडियो में आशा भोसले को काम करते देखना किसी जादू से कम नहीं था। उनकी आवाज, उनकी ऊर्जा और उनका समर्पण हर किसी को प्रेरित करता था। उनके जाने से संगीत जगत में जो खालीपन आया है, उसे भर पाना लगभग असंभव है।

आशा भोसले न केवल एक महान गायिका थीं, बल्कि वह एक ऐसी शख्सियत थीं, जिन्होंने अपने काम और व्यवहार से कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। उनकी यादें और उनका संगीत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।

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