1 Sep 2026, Tue

जन्म से दृष्टिबाधित, गुजारे के लिए ट्रेन में गाए गाने, अब ‘हनुमान अंश’ में गूंजी सुनील लोधी की आवाज, हिट हुआ भजन

फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों दर्शकों के बीच अपनी कहानी और भक्ति से जुड़े संगीत को लेकर चर्चा में बनी हुई है। फिल्म के एक भजन ने सोशल मीडिया पर लोगों का खास ध्यान खींचा है। ‘मेरे संकट के कटैया हनुमान’ नाम के इस भजन को लोकगायक सुनील लोधी ने अपनी आवाज दी है। खास बात यह है कि सुनील लोधी ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बेहद मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है। जन्म से दृष्टिबाधित सुनील कभी ट्रेनों और गांव-देहात में भजन गाकर अपनी आजीविका चलाते थे। आज उनकी आवाज बड़े पर्दे पर सुनाई दे रही है और लोग उनकी प्रतिभा की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

बचपन से ही संगीत का जुनून

सुनील लोधी का जन्म एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। जन्म से ही दृष्टिबाधित होने के कारण उनके सामने कई चुनौतियां थीं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से वह नियमित शिक्षा भी हासिल नहीं कर सके। संगीत की उन्होंने किसी संस्थान से औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली, लेकिन बचपन से ही उनका लगाव भजन और लोकसंगीत से रहा।

महज 10 साल की उम्र में उन्होंने तंबूरा बजाना सीख लिया था। धीरे-धीरे यही वाद्य यंत्र उनके संगीत सफर का साथी बन गया। उन्होंने अपनी आवाज और अभ्यास के दम पर भजन गाना शुरू किया और समय के साथ आसपास के इलाकों में उनकी पहचान बनने लगी।

ट्रेनों और गांवों में गाते थे भजन

एक दौर ऐसा भी था जब सुनील लोधी ट्रेनों में यात्रियों के बीच भजन गाया करते थे। इसके अलावा वह गांव-गांव घूमकर तंबूरा बजाते हुए धार्मिक गीत और भजन सुनाते थे। इन्हीं प्रस्तुतियों के जरिए होने वाली आमदनी से उनका गुजारा चलता था।

मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संगीत का साथ नहीं छोड़ा। उनके लिए भजन सिर्फ कमाई का जरिया नहीं बल्कि अपनी भावनाओं और आस्था को व्यक्त करने का माध्यम भी रहा। भगवान हनुमान के प्रति उनकी गहरी आस्था उनके गायन में भी दिखाई देती है।

फिल्म के भजन ने बदल दी जिंदगी

सुनील लोधी की आवाज सोशल मीडिया के जरिए फिल्म निर्माताओं तक पहुंची। उनकी गायकी से प्रभावित होकर उन्हें ‘हनुमान अंश’ में भजन गाने का अवसर मिला। फिल्म में उनकी आवाज में रिकॉर्ड किया गया भजन रिलीज होते ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय होने लगा।

भजन के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इसके पीछे की आवाज को पहचानने की कोशिश की। इसके बाद सुनील लोधी की कहानी भी तेजी से लोगों तक पहुंची। उनकी सादगी, संघर्ष और गायकी ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

बिना ट्रेनिंग के हासिल किया बड़ा मुकाम

सुनील लोधी की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े संगीत संस्थान से प्रशिक्षण नहीं लिया। न उनके पास फिल्म इंडस्ट्री में कोई मजबूत संपर्क था और न ही उनके लिए कोई आसान रास्ता मौजूद था। उन्होंने अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर अपनी पहचान बनाई।

कभी ट्रेन में यात्रियों के बीच भजन गाने वाले सुनील की आवाज अब सिनेमाघरों तक पहुंच चुकी है। उनका सफर यह दिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रतिभा और हौसले के दम पर इंसान अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है।

आज सुनील लोधी की आवाज को मिल रही लोकप्रियता उनके वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। उनका सफर उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हुनर को आगे बढ़ाने का सपना देखते हैं।

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