10 Apr 2026, Fri

जनगणना 2027 को लेकर आया नया अपडेट, जानें पहले चरण में कितने परिवारों ने उठाया स्व-गणना का लाभ

Census 2027: देश में शुरू हुई डिजिटल जनगणना, पहली बार ‘सेल्फ एन्युमरेशन’ की सुविधा

नई दिल्ली: भारत में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है और इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार नागरिकों को ‘सेल्फ एन्युमरेशन’ यानी खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा दी गई है।

भारत के महापंजीयक (RGI) के अनुसार, अब तक 5.72 लाख से अधिक परिवार इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठा चुके हैं, जो देश में तकनीकी भागीदारी के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।

पहली बार सेल्फ एन्युमरेशन की सुविधा

जनगणना 2027 में पहली बार लोगों को घर बैठे वेब-पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया गया है। यह प्रक्रिया 16 भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग आसानी से इसमें भाग ले सकें।

नागरिकों को यह जानकारी भरने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाता है, जो घर-घर जाकर किए जाने वाले सर्वे से ठीक पहले होता है। इस दौरान लोग अपने मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग-इन करके जरूरी विवरण भर सकते हैं।

कैसे करें सेल्फ एन्युमरेशन?

सेल्फ एन्युमरेशन के लिए नागरिकों को आधिकारिक पोर्टल पर जाकर मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉग-इन करना होता है। जानकारी भरने के बाद एक ‘सेल्फ एन्युमरेशन आईडी’ (SE ID) जारी की जाती है।

जब सरकारी एन्युमरेटर घर पर आएंगे, तो नागरिकों को यह SE ID दिखानी होगी। इससे डेटा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।

किन राज्यों में शुरू हुई प्रक्रिया

यह सुविधा उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है, जहां 16 अप्रैल से मकान सूचीकरण और गणना (HLO) शुरू होनी है।

इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, सिक्किम, ओडिशा, लक्षद्वीप, मिजोरम और दिल्ली के कुछ क्षेत्र जैसे NDMC और कैंटोनमेंट बोर्ड शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से डिजिटल पोर्टल तैयार किया गया है।

पूरी तरह गोपनीय होगी जानकारी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना 2027 के तहत एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इसे सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत भी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

इसका उद्देश्य नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि लोग बिना किसी झिझक के सही जानकारी प्रदान कर सकें।

स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना

यह जनगणना स्वतंत्रता के बाद देश की आठवीं जनगणना है। इससे पहले आखिरी जनगणना वर्ष 2011 में आयोजित की गई थी।

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित होने जा रही है, जिससे डेटा संग्रहण और विश्लेषण अधिक तेज और सटीक हो सकेगा।

सरकार की अहम पहल

इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की मशीनरी मिलकर काम कर रही है। गृहमंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत राज्यों के मुख्य सचिवों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

निष्कर्ष

जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल और नागरिक-भागीदारी आधारित जनगणना बनती जा रही है। ‘सेल्फ एन्युमरेशन’ जैसी सुविधा न सिर्फ प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि लोगों को राष्ट्र निर्माण में सीधे भाग लेने का अवसर भी देगी।

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