ईरान-इजरायल जंग के बीच ट्रंप का बड़ा ऐलान, 10 दिन के लिए ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला
वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Donald Trump ने बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों को 10 दिनों के लिए रोकने की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय ईरानी सरकार के अनुरोध पर लिया गया है और इसका उद्देश्य क्षेत्र में तनाव को कम करना है।
ट्रंप की इस घोषणा के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। Mohammad Bagher Ghalibaf ने ईरानी सेना और जनता की सराहना करते हुए कहा कि उनके बलिदानों ने देश को “ऐतिहासिक जीत” के करीब पहुंचा दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “कोई भी ईरान को अल्टीमेटम नहीं दे सकता” और देश अपने हितों की रक्षा करना जानता है।
गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पिछले 25 दिनों से सड़कों पर डटे लोगों और सशस्त्र बलों के साहस ने देश को मजबूत बनाया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और मौजूदा हालात को अपने पक्ष में बदलने के लिए तैयार है।
जारी हैं हमले, बढ़ रहा तनाव
हालांकि अमेरिका की ओर से हमले रोकने की घोषणा के बावजूद Israel की सैन्य कार्रवाई जारी है। इजरायली रक्षा बलों ने राजधानी तेहरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
इस संघर्ष का असर अब सिर्फ इन तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। युद्ध की वजह से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
भारी जानमाल का नुकसान
ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री अली जाफरियन के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध में अब तक कम से कम 1,900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों लोग घायल हुए हैं और कई इलाकों में बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
कैसे शुरू हुआ था संघर्ष?
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमजोर करना बताया गया।
इन शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए थे, जिसके बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई।
क्या आगे कम होगा तनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम तनाव कम करने की दिशा में एक संकेत हो सकता है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। इजरायल के हमले जारी रहने और ईरान के कड़े रुख के चलते यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में हालात सामान्य होंगे या नहीं।
कुल मिलाकर, यह संघर्ष अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले चुका है, जिसमें कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों समानांतर चल रही हैं। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह 10 दिन का विराम किसी स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम साबित होगा या नहीं।

