2 Nov 2026, Mon

चीन की नीतियों पर Quad सख्त, भारत की तारीफ; होर्मुज और लाल सागर को लेकर भी बड़ा ऐलान

अमेरिका के अटलांटा में आयोजित चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों में भारत की त्वरित सहायता की सराहना की गई। वहीं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने वाली व्यापार नीतियों और मनमाने निर्यात प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई गई।

बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में आर्थिक सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समुद्री रास्तों पर निर्बाध आवाजाही के महत्व पर जोर दिया गया।

नेपाल में बाढ़ के दौरान भारत की मदद की सराहना

नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के दौरान भारत की सक्रिय भूमिका को बैठक में विशेष रूप से सराहा गया। संयुक्त बयान में आपदा के समय तेजी से सहायता पहुंचाने और जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख किया गया।

भारत ने नेपाल में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई थी। इस सहयोग को पड़ोसी देशों के साथ आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत की प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर राहत सामग्री, बचाव उपकरण और आर्थिक मदद प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बैठक में नेपाल के लिए किए गए प्रयासों की सराहना इसी व्यापक क्षेत्रीय सहयोग के संदर्भ में की गई।

चीन का नाम लिए बिना व्यापार नीतियों पर चिंता

बैठक का एक महत्वपूर्ण मुद्दा वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता रहा। संयुक्त बयान में किसी देश का सीधे नाम लिए बिना मनमाने निर्यात प्रतिबंधों, बाजार को प्रभावित करने वाली नीतियों और कुछ उद्योगों में जरूरत से अधिक उत्पादन को लेकर चिंता जताई गई।

इन मुद्दों को वैश्विक बाजार में असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला के लिए चुनौती के रूप में देखा गया। बयान में कहा गया कि आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था, पारदर्शी व्यापार और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत है।

इन टिप्पणियों को चीन की कुछ व्यापार नीतियों के संदर्भ में देखा जा रहा है, हालांकि संयुक्त बयान में किसी देश का स्पष्ट नाम नहीं लिया गया। चारों देशों ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता और समृद्धि के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

होर्मुज और लाल सागर में सुरक्षित आवाजाही पर जोर

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रही। चारों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित तथा निर्बाध आवाजाही का समर्थन किया।

इन समुद्री रास्तों का वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान है। यहां तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट आने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल की आपूर्ति और माल ढुलाई प्रभावित हो सकती है।

बैठक में जहाजों और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने पर भी जोर दिया गया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति

बैठक के बाद एस. जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया।

इसके अलावा आतंकवाद से मुकाबले, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय देशों की क्षमता बढ़ाने जैसे विषयों पर मिलकर काम करने की आवश्यकता भी सामने आई। बैठक का व्यापक संदेश यह रहा कि मानवीय सहायता, आर्थिक सुरक्षा और समुद्री सहयोग के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना चारों देशों की साझा प्राथमिकता है।

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