18 Feb 2026, Wed

गुजरात पुलिस भर्ती प्रक्रिया में विवाद, अचानक कैसे घट गई हाइट? कई कैंडिडेट्स पहुंचे हाई कोर्ट

Gujarat High Court पहुंचा गुजरात पुलिस भर्ती विवाद, 165 सेमी हाइट कट-ऑफ पर उठे सवाल

गुजरात में पुलिस भर्ती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि हालिया भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनकी लंबाई (हाइट) पहले से कम मापी गई, जिसके कारण वे न्यूनतम 165 सेंटीमीटर की अनिवार्य सीमा से नीचे रह गए और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस मामले में अभ्यर्थियों ने गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

क्या है पूरा मामला?

गुजरात पुलिस भर्ती की फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) में पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम लंबाई 165 सेमी तय है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि पिछली भर्ती प्रक्रिया में उनकी हाइट 165 सेमी या उससे अधिक मापी गई थी और उन्हें अगले चरण के लिए योग्य घोषित किया गया था।

हालांकि, इस बार जब नई भर्ती प्रक्रिया में उनकी लंबाई मापी गई तो वह 165 सेमी से कम पाई गई। इसके आधार पर उन्हें इनएलिजिबल घोषित कर दिया गया, जिससे उनकी नौकरी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।

किन उम्मीदवारों ने लगाई याचिका?

हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वालों में गांधीनगर के तुषार भालिया और गोविंद सिंधव, बनासकांठा के पप्पू परमार और अहमदाबाद के मुकेश चौहान शामिल हैं। इन सभी ने पुलिस विभाग की अलग-अलग पोस्ट के लिए आवेदन किया था।

उनका कहना है कि उनकी लंबाई अचानक कम नहीं हो सकती और मापने की प्रक्रिया में त्रुटि की संभावना है। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से दोबारा निष्पक्ष माप की मांग की।

कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस निरज़र मेहता की बेंच ने एक शर्त के साथ राहत दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रत्येक याचिकाकर्ता 10,000 रुपये कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करेगा। यदि दोबारा माप में उनकी लंबाई 165 सेमी या उससे अधिक पाई जाती है, तो यह राशि वापस कर दी जाएगी।

कोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल सुपरविजन में दोबारा हाइट मापने का आदेश दिया है। उम्मीदवारों को 19 फरवरी को GMERS Civil Hospital, Sola में मेडिकल ऑफिसर के सामने उपस्थित होने को कहा गया है। उन्हें जमा की गई राशि का प्रमाण भी साथ लाना होगा।

पूरी प्रक्रिया की होगी वीडियोग्राफी

कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि दोबारा माप की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए, ताकि इंच और सेंटीमीटर को लेकर किसी तरह का विवाद न रहे। अस्पताल प्रशासन को सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही 23 फरवरी तक पूरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

क्या हो सकता है असर?

यह मामला भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और माप के मानकों पर सवाल खड़ा करता है। अगर उम्मीदवारों का दावा सही साबित होता है, तो भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग तेज हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें दोबारा माप और कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *