खरीफ सीजन 2026 को लेकर उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर चर्चा तेज हो गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर West Asia में जारी संघर्ष के चलते प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका असर भारत के उर्वरक सेक्टर पर भी पड़ रहा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
उर्वरक विभाग के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए देश में कुल उर्वरकों की आवश्यकता लगभग 3.9 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 3.61 करोड़ टन से अधिक है। इसके बावजूद सरकार ने आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं। वर्तमान में देश के पास करीब 1.8 करोड़ टन उर्वरकों का स्टॉक मौजूद है, जो पिछले साल इसी अवधि के 1.47 करोड़ टन से काफी ज्यादा है।
वैश्विक संकट के चलते प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गैस की उपलब्धता मांग के मुकाबले घटकर लगभग 80 प्रतिशत रह गई है। प्राकृतिक गैस अमोनिया उत्पादन का मुख्य घटक है, जो आगे चलकर Urea और DAP जैसे उर्वरकों के निर्माण में उपयोग होता है। ऐसे में लागत बढ़ना स्वाभाविक है।
खाड़ी क्षेत्र, जो भारत की उर्वरक जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है, इस समय प्रभावित है। यह क्षेत्र भारत की यूरिया की 20-30 प्रतिशत, डीएपी की करीब 30 प्रतिशत और एलएनजी की लगभग 50 प्रतिशत आपूर्ति करता रहा है। मौजूदा हालात के चलते एलएनजी, अमोनिया और सल्फर जैसी कच्ची सामग्री की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है।
इस संकट से निपटने के लिए सरकार और उर्वरक कंपनियां वैकल्पिक उपाय अपना रही हैं। घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति, जो पहले घटाकर 60 प्रतिशत कर दी गई थी, अब बढ़ाकर 75-80 प्रतिशत कर दी गई है। इससे उत्पादन में सुधार हुआ है और संभावित कमी को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।
साथ ही, कमी को पूरा करने के लिए कंपनियां स्पॉट मार्केट से एलएनजी खरीद रही हैं। हालांकि, इसकी कीमतें पहले के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। जहां पहले एलएनजी की कीमत 11-12 डॉलर प्रति यूनिट थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 19.5-19.6 डॉलर प्रति यूनिट हो गई है। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की संभावना है।
फिर भी, सरकार ने किसानों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि उर्वरकों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। किसानों को Urea 266 रुपये प्रति 45 किलोग्राम और DAP 1,350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम की दर से ही मिलता रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन भारत ने समय रहते जो कदम उठाए हैं, उससे आपूर्ति पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को समय पर और सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध होते रहें।
कुल मिलाकर, बढ़ती लागत और वैश्विक संकट के बावजूद देश में उर्वरकों की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा, यह भरोसा सरकार ने दोहराया है।

