13 Apr 2026, Mon

क्रूड ऑयल में उबाल से सरकारी तेल कंपनियों के शेयर 5% तक लुढ़के, जानें भाव

मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और Strait of Hormuz पर मंडराते संकट का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। खासकर सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर भारी दबाव बना हुआ है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ रहा है।

सोमवार, 13 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर HPCL के शेयरों में करीब 5.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि BPCL में 5 प्रतिशत और IOC में 3.7 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। यह गिरावट निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है, जो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने वाले असर को लेकर सतर्क हैं।

दरअसल, Crude Oil इन कंपनियों के लिए सबसे बड़ी इनपुट लागत होती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इन कंपनियों के लिए लागत बढ़ जाती है, जबकि घरेलू बाजार में कीमतें तुरंत बढ़ाना हमेशा संभव नहीं होता। इससे उनके मुनाफे पर दबाव आता है और शेयर बाजार में उनकी वैल्यूएशन प्रभावित होती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि WTI क्रूड 104 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। कीमतों में यह तेजी United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव और शांति वार्ता के विफल होने के बाद आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, वहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा इस जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने की चेतावनी ने बाजार में और अनिश्चितता बढ़ा दी है।

इस तनाव का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार को भी कदम उठाने पड़े हैं। घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात शुल्क में बड़ा इजाफा किया है। डीजल पर निर्यात शुल्क को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि जेट फ्यूल पर यह 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

विश्लेषकों के अनुसार, जब तक मध्य-पूर्व में तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और बाजार के रुझानों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

कुल मिलाकर, वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय बाजार और ऊर्जा क्षेत्र पर गहराई से पड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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