3 Oct 2026, Sat

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर RBI सतर्क, RBI गवर्नर बोले- मॉनेटरी पॉलिसी डोमेस्टिक ग्रोथ और महंगाई की स्थिति पर केंद्रित

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत के सतर्क रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि डिजिटल एसेट्स से जुड़ी कुछ तकनीकों में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के व्यापक इस्तेमाल से जुड़े मौद्रिक और वित्तीय जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने खास तौर पर मौद्रिक संप्रभुता, मौद्रिक नीति, पूंजी प्रवाह और मुद्रा की एकरूपता से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया।

गवर्नर के मुताबिक, भारत का फोकस ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल पर है जो वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। इनमें डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और टोकनाइजेशन जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों का इस्तेमाल केंद्रीय बैंक के स्तर पर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भी किया जा रहा है।

क्रिप्टोकरेंसी पर क्यों है सावधानी?

क्रिप्टोकरेंसी के संबंध में आरबीआई की मुख्य चिंता केवल डिजिटल करेंसी की तकनीक नहीं, बल्कि उसके व्यापक आर्थिक प्रभावों से जुड़ी है। संजय मल्होत्रा ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स का विस्तार मुद्रा की एकरूपता को प्रभावित कर सकता है। मुद्रा की एकरूपता का मतलब है कि किसी देश में आधिकारिक मुद्रा की एक इकाई का मूल्य समान बना रहे और भुगतान व्यवस्था में उसका भरोसा कायम रहे।

इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल मौद्रिक नीति के प्रभाव को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर उन अर्थव्यवस्थाओं में जहां पूंजी के अंतरराष्ट्रीय आवागमन पर कुछ नियंत्रण या प्रतिबंध मौजूद हैं, वहां डिजिटल एसेट्स के जरिये होने वाले पूंजी प्रवाह को लेकर अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

तकनीक का विरोध नहीं, इस्तेमाल पर जोर

आरबीआई गवर्नर ने यह स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक नई तकनीकों के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी जैसी बुनियादी तकनीकों में संभावनाएं हैं और इनका इस्तेमाल वित्तीय क्षेत्र में किया जा सकता है।

डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था है जिसमें रिकॉर्ड किसी एक केंद्रीय स्थान पर रखने के बजाय नेटवर्क से जुड़े कई कंप्यूटरों पर साझा किए जा सकते हैं। वहीं टोकनाइजेशन में किसी संपत्ति, अधिकार या संवेदनशील जानकारी को डिजिटल टोकन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे उसके प्रबंधन और लेनदेन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

घरेलू भुगतान व्यवस्था में पहले ही बड़ा बदलाव

गवर्नर ने यह भी कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने के पीछे घरेलू भुगतान व्यवस्था की समस्याओं को मुख्य कारण नहीं माना जा सकता। भारत समेत कई देशों में डिजिटल भुगतान पहले की तुलना में तेज, सुविधाजनक और कम लागत वाला हुआ है।

ऐसे में क्रिप्टो से जुड़े संभावित लाभों और जोखिमों की चर्चा करते समय सीमा पार भुगतान को भी महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। अलग-अलग देशों की मुद्राओं और भुगतान प्रणालियों के बीच लेनदेन में लागत, समय और नियामकीय प्रक्रियाएं चुनौती बनी रहती हैं।

कुल मिलाकर, भारत का रुख ऐसी तकनीकों के विकास और प्रयोग को प्रोत्साहित करने तथा क्रिप्टोकरेंसी के व्यापक आर्थिक प्रभावों को लेकर सावधानी बरतने के बीच संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित दिखाई देता है।

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