आजकल कम उम्र के लोगों में भी घुटनों से कट-कट या चटकने की आवाज आने की समस्या देखने को मिल रही है। अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। घुटनों को मोड़ते समय, सीढ़ियां चढ़ते-उतरते या बैठकर उठते समय ऐसी आवाज सुनाई दे सकती है। हालांकि, हर बार इसका मतलब किसी गंभीर बीमारी से नहीं होता, लेकिन यदि आवाज के साथ दर्द, सूजन या अकड़न भी हो, तो इसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।
घुटनों से कट-कट की आवाज क्यों आती है?
मेडिकल भाषा में जोड़ों से आने वाली चटकने या चरमराने जैसी आवाज को क्रेपिटस कहा जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार जोड़ों के अंदर मौजूद साइनोवियल फ्लूइड में गैस के बुलबुले बनने और फूटने से आवाज आती है। यह तरल पदार्थ जोड़ों को चिकनाई देने और हड्डियों के बीच घर्षण कम करने में मदद करता है।
इसके अलावा, घुटनों के आसपास मौजूद टेंडन और लिगामेंट्स के हिलने या अपनी स्थिति बदलने से भी चटकने जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। यदि आवाज के साथ कोई अन्य परेशानी नहीं है, तो कई मामलों में यह सामान्य हो सकती है।
हालांकि, लगातार आवाज आने के पीछे मांसपेशियों की कमजोरी, घुटने की टोपी की असामान्य गति या कार्टिलेज से जुड़ी समस्या भी हो सकती है।
कम उम्र में घुटनों की समस्या के प्रमुख कारण
जवानी में घुटनों से आवाज आने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- लंबे समय तक बैठे रहना: लगातार एक ही स्थिति में बैठने से मांसपेशियों की सक्रियता और जोड़ों की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है।
- मांसपेशियों की कमजोरी: जांघों और घुटनों के आसपास की मांसपेशियां कमजोर होने से घुटने की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
- शारीरिक गतिविधियों की कमी: नियमित व्यायाम न करने से मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन कम हो सकता है।
- अधिक वजन: शरीर का अतिरिक्त वजन घुटनों पर दबाव बढ़ाता है।
- गलत तरीके से एक्सरसाइज करना: गलत तकनीक से व्यायाम या अचानक बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने से घुटने पर चोट लग सकती है।
कुछ मामलों में कार्टिलेज में बदलाव, पुरानी चोट या घुटने की टोपी की गति से जुड़ी समस्या भी आवाज का कारण बन सकती है।
किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?
यदि घुटनों से आवाज आने के साथ दर्द, सूजन, अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। घुटना बार-बार अटकना, अस्थिर महसूस होना या चोट लगने के बाद अचानक आवाज आने लगना भी ध्यान देने योग्य संकेत हैं।
ऐसे लक्षणों के पीछे ऑस्टियोआर्थराइटिस, कार्टिलेज की चोट या जोड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, केवल आवाज के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
घुटनों की सेहत बनाए रखने के लिए नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधियां करें। अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, साइकिल चलाना और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम फायदेमंद हो सकते हैं। व्यायाम करते समय सही तकनीक अपनाएं और दर्द होने पर जोर लगाने से बचें।
इसके अलावा, शरीर का वजन संतुलित रखें, लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में उठकर चलें। पर्याप्त आराम करना भी जरूरी है।
ध्यान रखें: घुटनों से कट-कट की आवाज आना अपने आप में गठिया या कार्टिलेज खराब होने का प्रमाण नहीं है। लेकिन आवाज के साथ दर्द, सूजन या चलने में परेशानी हो, तो समय पर ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लें। शुरुआती जांच से समस्या का कारण समझने और उचित उपचार तय करने में मदद मिल सकती है।

