नई दिल्ली: कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद जिंदगी बाहर से जितनी आसान और सुकून भरी नजर आती है, हकीकत में उसमें कई तरह की चुनौतियां भी होती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में आरुषि नाम की महिला ने करियर ब्रेक के दौरान अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें अपनी जॉब से जुड़ी कई चीजों की कमी महसूस होती है, लेकिन ऑफिस की राजनीति, तनाव और लगातार काम करने की आदत बिल्कुल याद नहीं आती।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
आरुषि ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @dil_aur_dopamine से वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी और उससे बाहर की जिंदगी के बीच के अंतर को बेहद ईमानदारी से बताया। उनका कहना है कि उन्हें कमाई और आर्थिक स्वतंत्रता की याद आती है, लेकिन उस पैसे को कमाने के लिए होने वाली लगातार भागदौड़ और थकान की नहीं।
उन्होंने कहा कि उन्हें मुश्किल समस्याओं को हल करने में मिलने वाली संतुष्टि याद आती है, लेकिन रात देर तक ऑफिस का काम करने का दबाव बिल्कुल याद नहीं आता। इसी तरह उन्हें अपने सहकर्मियों के साथ बिताया समय याद आता है, मगर ऑफिस पॉलिटिक्स से दूरी ही बेहतर लगती है।
‘कमाई की याद आती है, लेकिन थकान की नहीं’
आरुषि ने अपने वीडियो में बताया कि कॉर्पोरेट नौकरी में रूटीन और करियर ग्रोथ का अपना महत्व होता है। नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें उस व्यवस्थित जिंदगी की कमी महसूस होती है। हालांकि, सुबह जल्दी उठना, काम का दबाव और लगातार जिम्मेदारियों के बीच फंसे रहना उन्हें बिल्कुल याद नहीं आता।
उन्होंने यह भी बताया कि आर्थिक स्वतंत्रता का एहसास उन्हें पसंद था, लेकिन उस पैसे के लिए खुद को लगातार तनाव में रखना अब उन्हें सही नहीं लगता। उनके मुताबिक, किसी चीज को मिस करना और फिर भी यह महसूस करना कि उसके बिना जिंदगी बेहतर है, दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं।
छह महीने से करियर ब्रेक पर हैं आरुषि
आरुषि ने बताया कि वह पिछले करीब छह महीने से करियर ब्रेक पर हैं। शुरुआत में उन्हें लगा था कि नौकरी छोड़ने के बाद जिंदगी काफी आरामदायक होगी। न अलार्म की चिंता होगी, न ऑफिस पहुंचने की जल्दी और न ही किसी बॉस या सहकर्मी को जवाब देने का दबाव।
लेकिन समय बीतने के साथ उन्हें पता चला कि नौकरी छोड़ने के बाद भी जिंदगी में कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने बताया कि करियर ब्रेक के दौरान उन्हें गिल्ट, आत्म-संदेह और अपनी पहचान को लेकर भी कई सवालों का सामना करना पड़ा।
नौकरी छोड़ना आसान, लेकिन पहचान बदलना मुश्किल
आरुषि की कहानी उन लोगों से जुड़ती नजर आती है जो कॉर्पोरेट जिंदगी की भागदौड़ से परेशान होकर नौकरी छोड़ने या ब्रेक लेने का फैसला करते हैं। उनका अनुभव बताता है कि नौकरी छोड़ने से तनाव और ऑफिस की परेशानियां जरूर कम हो सकती हैं, लेकिन इसके साथ आर्थिक सुरक्षा, करियर की दिशा और अपनी पहचान को लेकर नई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
सोशल मीडिया पर आरुषि का वीडियो लोगों को इसलिए भी पसंद आ रहा है क्योंकि उन्होंने नौकरी छोड़ने के अनुभव को सिर्फ आजादी और सुकून के नजरिए से नहीं देखा। उन्होंने बताया कि किसी नौकरी को छोड़ने के बाद भी उसकी कुछ अच्छी चीजें याद आ सकती हैं, जबकि उससे जुड़ी परेशानियों से छुटकारा पाना राहत देता है।

