उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पिछले कई वर्षों से देश और विदेश में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों का कारोबार चला रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क आधुनिक तकनीक की मदद से प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के नाम पर नकली डिग्री, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार कर बेचता था। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह करीब 13 वर्षों से सक्रिय था और भारत के अलावा सऊदी अरब, कनाडा तथा यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था। आरोपियों द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज इतने पेशेवर तरीके से बनाए जाते थे कि पहली नजर में उन्हें असली और नकली में पहचान पाना बेहद मुश्किल था।
जांच में सामने आया है कि गिरोह का मुख्य आरोपी जियाउल हसन उर्फ समीर ग्राफिक डिजाइनिंग और डिजिटल प्रिंटिंग तकनीकों में माहिर था। वह कथित तौर पर विदेशी मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपी विदेश में स्थायी रूप से बसने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही कानून के शिकंजे में आ गया।
कानपुर पुलिस, एसआईटी और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान एक अत्याधुनिक प्रिंटिंग सेटअप का पता चला। यहां ऐसे उपकरण और सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जा रहे थे जिनकी मदद से उच्च गुणवत्ता वाले नकली दस्तावेज तैयार किए जाते थे। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री यह संकेत देती है कि गिरोह ने बड़े पैमाने पर लोगों को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए हैं।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने दर्जनों फर्जी मार्कशीट, डिग्री, प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, ट्रांसक्रिप्ट और शोध डिग्री से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा कई कंप्यूटर सिस्टम, लैपटॉप, हाई-रेजोल्यूशन प्रिंटर, हार्ड डिस्क, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और नेटवर्किंग उपकरण भी जब्त किए गए हैं। इन सभी उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है। बैंक खातों, ऑनलाइन भुगतान और विदेशी लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कारोबार से कितनी कमाई की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों को आशंका है कि नेटवर्क में कई अन्य लोग भी जुड़े हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक कितने लोगों ने इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल नौकरी, उच्च शिक्षा या विदेश यात्रा के लिए किया है। यदि ऐसे मामलों की पुष्टि होती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। यह कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली में सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत को भी उजागर करती है।

