राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की किरकिरी, बिहार-ओडिशा-हरियाणा में क्रॉस वोटिंग और गुमशुदगी से बढ़ी मुश्किलें
नई दिल्ली: हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों ने देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के भीतर गहरे असंतोष और अनुशासनहीनता को उजागर कर दिया है। चुनाव के दौरान बिहार, ओडिशा और हरियाणा में सामने आई घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं के बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई वाली कांग्रेस की रणनीति और संगठन क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।
बिहार में तीन विधायक गायब
सबसे चौंकाने वाली घटना बिहार से सामने आई, जहां कांग्रेस के तीन विधायक मतदान के दिन अचानक गायब हो गए। उनका फोन भी बंद या अनरीचेबल बताया गया। कांग्रेस ने महागठबंधन के तहत आरजेडी उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान किया था, लेकिन विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी को बड़ा झटका दिया।
बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने आरोप लगाया कि उनके विधायकों को “चुरा लिया गया”, इशारों-इशारों में भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 13 मार्च तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक परिस्थितियां बदल गईं।
ओडिशा में क्रॉस वोटिंग से झटका
ओडिशा में भी कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। यहां पार्टी के कम से कम तीन विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग की। इन विधायकों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला।
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों विधायकों को निलंबित कर दिया। ओडिशा की राजनीति में नवीन पटनायक की बीजेडी पहले से ही दबाव में है, और इस बीच कांग्रेस का यह आंतरिक संकट उसकी स्थिति को और कमजोर करता दिख रहा है।
हरियाणा में भी बिगड़ा समीकरण
हरियाणा में कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी कोशिश की। पार्टी नेताओं ने विधायकों को रिजॉर्ट में ठहराया, ताकि किसी तरह की टूट-फूट न हो। इसके बावजूद मतदान के दौरान कथित तौर पर पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की खबरों ने कांग्रेस की रणनीति को ध्वस्त कर दिया।
हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत हासिल कर ली, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी की अंदरूनी कमजोरी को उजागर कर दिया। वहीं भाजपा के संजय भाटिया ने दूसरी सीट पर जीत दर्ज की।
संगठन और नेतृत्व पर सवाल
इन तीन राज्यों की घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक अनुशासन कमजोर पड़ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में क्यों असफल हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल चुनावी हार-जीत का मामला नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर गुटबाजी और नेतृत्व की पकड़ कमजोर होने का संकेत भी है।
आगे क्या?
कांग्रेस ने अब बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई का संकेत दिया है। ओडिशा में जहां निलंबन हो चुका है, वहीं हरियाणा में नोटिस जारी करने की तैयारी है। बिहार में भी शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अगर पार्टी समय रहते संगठन को मजबूत करने और अनुशासन बहाल करने में सफल नहीं होती, तो आने वाले चुनावों में उसे और बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

