ग्रेटर नोएडा में अपना घर खरीदने का सपना देखने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और कम आय वाले परिवारों के लिए राहत की खबर है। प्राधिकरण ने शहर में किफायती बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को कम कीमत में घर उपलब्ध कराना है, जो निजी आवासीय परियोजनाओं की ऊंची कीमतों के कारण अपना मकान खरीदने में परेशानी महसूस करते हैं।
इसके साथ ही रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों और राज्यों से ग्रेटर नोएडा आने वाले श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था करने की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इससे प्रवासी श्रमिकों को रहने के लिए बेहतर और सुरक्षित विकल्प मिलने की उम्मीद है।
दो स्थानों पर चिन्हित की गई जमीन
किफायती आवास योजना के लिए ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पतवाड़ी गांव में लगभग 44,750 वर्गमीटर जमीन चिन्हित की गई है। इसके अलावा ईस्ट क्षेत्र में बिरौंदी गांव के पास करीब 18 हजार वर्गमीटर भूमि पर भी आवासीय परियोजना विकसित करने की तैयारी है।
इन दोनों स्थानों पर करीब 30 से 40 वर्गमीटर आकार के फ्लैट बनाए जाने की योजना है। प्रस्तावित परियोजनाओं के तहत लगभग 4,000 से 5,000 किफायती फ्लैट तैयार किए जाने की संभावना है। हालांकि, आवासीय सोसाइटी कितनी मंजिल की होगी, इसका विस्तृत खाका आगे तैयार किया जाएगा। फ्लैटों में लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रावधान रखा गया है।
सोसाइटी में मिलेंगी रोजमर्रा की सुविधाएं
किफायती आवासीय परियोजना में केवल घर उपलब्ध कराने पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि वहां रहने वाले परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों का भी ख्याल रखा जाएगा। प्रस्तावित सोसाइटी में दूध और सब्जी के बूथ बनाए जाएंगे।
इसके अलावा दैनिक जरूरतों का सामान उपलब्ध कराने वाली दुकानों के लिए भी जगह निर्धारित की जाएगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आवासीय परिसर में ही जरूरी सुविधाएं मिलने से कम आय वाले परिवारों के लिए जीवन आसान होने की उम्मीद है।
महंगे निजी फ्लैटों के बीच किफायती घरों पर जोर
ग्रेटर नोएडा एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां रोजगार के लिए बड़ी संख्या में लोग दूसरे इलाकों से आते हैं। इनमें श्रमिक और कम आय वाले परिवार भी शामिल हैं। लंबे समय तक किराये के मकान में रहने के बाद अपना घर खरीदना इन परिवारों की प्राथमिकता होती है, लेकिन निजी परियोजनाओं में फ्लैटों की कीमत उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर हो सकती है।
इसी जरूरत को देखते हुए प्राधिकरण की ओर से किफायती आवास विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस योजना से कम आय वाले लोगों को शहर में स्थायी आवास का विकल्प मिलने की उम्मीद है।
प्रवासी श्रमिकों के लिए बनेंगे अस्थायी आश्रय
ग्रेटर नोएडा आने वाले श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए इकोटेक-6 और इकोटेक-11 में करीब 3,000-3,000 वर्गमीटर जमीन चिन्हित की गई है।
प्राधिकरण इन दोनों भूखंडों को श्रम विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करेगा। इसके बाद श्रमिकों के लिए आश्रयस्थलों का निर्माण किया जाएगा। इस व्यवस्था से दूसरे राज्यों से रोजगार के लिए आने वाले श्रमिकों को शुरुआती दौर में रहने के लिए सुरक्षित स्थान मिल सकेगा और उन्हें महंगे किराये या अस्थायी ठिकानों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
किफायती फ्लैटों और श्रमिक आश्रयस्थलों की ये दोनों योजनाएं ग्रेटर नोएडा में कम आय वाले परिवारों और कामगारों के लिए आवास की समस्या को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

