ग्लोबल तेल बाजार में अनिश्चितता: ब्रेंट क्रूड $103 के पार, अमेरिका-ईरान तनाव जारी
नई दिल्ली: ग्लोबल ऑयल मार्केट में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट में शांति की जो उम्मीदें जगी थीं, उन पर गुरुवार को फिर से पानी फिरता नजर आया। अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी बयानों ने निवेशकों के लिए उलझन बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है।
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत $103 के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग $91.54 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान का अमेरिका के साथ सीधे बातचीत से इनकार करना बताया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में तेल बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जहां कुछ दिन पहले कीमतों में गिरावट आई थी, वहीं अब एक बार फिर तेजी लौट आई है।
ईरान और अमेरिका के बयान से बढ़ी अनिश्चितता
ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ सीधे वार्ता की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने पुराने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी बातचीत के दौरान हमले हुए थे, इसलिए अब सीधे संवाद की संभावना नहीं है। इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के अलग-अलग बयान बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है और वैश्विक तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भी तेल की कीमतों को प्रभावित कर रही है। यह मार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 20% हिस्सा परिवहन करता है। यदि इस जलडमरूमध्य में कोई बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
बाजार में तेजी के संकेत
गुरुवार, 26 मार्च को कच्चे तेल की कीमतों में 1% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड $103.46 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड $91.54 के आसपास रहा। इससे पहले कुछ दिनों में तेल बाजार में गिरावट के संकेत देखे गए थे, लेकिन अमेरिका-ईरान के विवाद के कारण कीमतों में फिर से उछाल आया।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। निवेशकों और तेल उद्योग को लगातार इस स्थिति पर नजर रखनी होगी।
आम जनता पर असर
तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। यदि कीमतें लंबे समय तक बढ़ती रहती हैं, तो महंगाई बढ़ सकती है और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में भी इज़ाफा देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार को तेल आपूर्ति और कीमतों पर नजर रखनी होगी ताकि आम जनता पर ज्यादा भार न पड़े।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और वैश्विक तेल मांग के उतार-चढ़ाव के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। निवेशकों, उद्योगपतियों और आम जनता को आगामी दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की हर हरकत पर ध्यान रखना होगा।

