19 May 2026, Tue

‘ऑपरेशन सिंदूर को भारत की स्मार्ट पावर का सबसे बड़ा उदाहरण’, सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी ने बताया इसका कारण

Upendra Dwivedi ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की “स्मार्ट पावर” का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा है कि आज का भारत सिर्फ सैन्य ताकत के दम पर नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच, तकनीकी क्षमता और कूटनीतिक संतुलन के जरिए दुनिया में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह भारत की संयुक्त राष्ट्रीय शक्ति का प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में सैन्य सटीकता, सूचना नियंत्रण, कूटनीतिक संदेश और आर्थिक मजबूती—चारों का प्रभावी इस्तेमाल किया गया। सेना प्रमुख के मुताबिक, इस अभियान ने दुश्मन की आतंकी संरचनाओं को गहराई तक जाकर निशाना बनाया और वर्षों से चली आ रही रणनीतिक सोच को बदलकर रख दिया।

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को 88 घंटे बाद रणनीतिक तरीके से रोका गया, जो यह दिखाता है कि भारत केवल कार्रवाई करना ही नहीं जानता, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेना भी जानता है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि “भारत को पता है कि किस समय कौन-सी शक्ति का कितना इस्तेमाल करना है और कब सैन्य कार्रवाई को रणनीतिक सफलता में बदलना है।”

सेना प्रमुख ने अपने भाषण में बदलती वैश्विक परिस्थितियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अव्यवस्था, अविश्वास और बदलते गठबंधन नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक समय माना जाता था कि व्यापार, सप्लाई चेन और डिजिटल कनेक्टिविटी देशों को संघर्ष से दूर रखेंगी, लेकिन अब इन्हीं साधनों का इस्तेमाल दबाव बनाने और रणनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है।

आधुनिक युद्ध के स्वरूप पर बात करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि तकनीक अब युद्ध का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है। पहले नई तकनीक को प्रयोगशाला से युद्ध क्षेत्र तक पहुंचने में कई दशक लगते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर टेक्नोलॉजी, क्वांटम सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी और ऑटोनॉमस सिस्टम भविष्य के युद्ध की दिशा तय करेंगे।

उन्होंने भारत से केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित न रहने की अपील की। सेना प्रमुख ने कहा कि भारत को स्वदेशी तकनीक विकसित कर वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। उनके मुताबिक, आत्मनिर्भरता अब केवल आर्थिक जरूरत नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता बन चुकी है।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी केवल सैन्य ताकत की कमी नहीं, बल्कि विदेशी सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिजों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अत्यधिक निर्भरता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को ऐसी रक्षा औद्योगिक क्षमता विकसित करनी होगी, जो न सिर्फ आत्मनिर्भर हो बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा भी कर सके।

अपने संबोधन के अंत में सेना प्रमुख ने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के शब्दों को याद करते हुए कहा, “शांति, शक्ति की अनुपस्थिति नहीं है। शांति, क्षमता, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की उपस्थिति है।” उनके इस बयान को भारत की नई रणनीतिक सोच और मजबूत रक्षा नीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

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