1 Oct 2026, Thu

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कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए जा रहे हैं। शिवकुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं, बूथ स्तर के एजेंटों और आम लोगों से अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे मामलों की जानकारी जुटाने और प्रशासन तक पहुंचाने की अपील की है।

शिवकुमार ने कहा- बड़ी संख्या में दिए जा रहे फॉर्म-7

डीके शिवकुमार ने बुधवार रात सोशल मीडिया के जरिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर देशभर में चिंता का माहौल है और मुख्यमंत्री के तौर पर प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कराकर मतदाता सूची से नाम हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों की जानकारी बेलगावी, बाल्की, मुदिगेरे, मैसूरु समेत राज्य के कई हिस्सों से सामने आई है।

शिवकुमार ने यह भी आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियों का असर अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं पर पड़ सकता है। हालांकि, ये आरोप मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित मामलों की आधिकारिक जांच एवं सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

चुनाव अधिकारियों से मांगा फॉर्म-7 का डेटा

मुख्यमंत्री ने बूथ लेवल एजेंटों, पार्टी नेताओं और मतदाताओं से अपील की कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्रों पर जमा किए गए फॉर्म-7 की जानकारी जुटाएं। उन्होंने खास तौर पर यह पता लगाने को कहा कि किसी मतदाता के नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराई गई है या नहीं।

शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने इन शिकायतों को लेकर पुलिस अधिकारियों, डिप्टी कमिश्नरों और चुनाव अधिकारियों से भी संबंधित डेटा मांगा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सत्यापित जानकारी उनके कार्यालय तक पहुंचाएं, ताकि मामले की पड़ताल की जा सके।

SIR प्रक्रिया को लेकर पहले से उठ रहे सवाल

कर्नाटक में SIR के दौरान मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के तहत नामों और विवरणों का सत्यापन किया जा रहा है। चुनाव अधिकारियों की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि किसी मतदाता को नोटिस मिलने का अर्थ सीधे तौर पर उसका नाम मतदाता सूची से हट जाना नहीं है। संबंधित प्रक्रिया में दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद आगे की कार्रवाई होती है।

बोले- आपका वोट आपका अधिकार है

डीके शिवकुमार ने अपने संदेश में कहा कि हर पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित रहना चाहिए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से अपील की कि वे अपने बूथ पर फॉर्म-7 से जुड़ी किसी भी आपत्ति या आवेदन की जानकारी की जांच करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पार्टी या समुदाय के बजाय प्रत्येक पात्र मतदाता के मतदान के अधिकार की रक्षा करना है। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करेंगे। अब इस पूरे मामले में चुनाव अधिकारियों की जांच और फॉर्म-7 से जुड़े आंकड़ों के सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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