ईरान में एक और फांसी, अमेरिका-ईरान वार्ता की संभावना के बीच तनाव बढ़ा
इस्लामाबाद/तेहरान: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की चर्चा तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर ईरान के अंदरूनी हालात एक बार फिर गंभीर होते दिख रहे हैं। शनिवार को ईरान ने एक और व्यक्ति को फांसी दे दी, जिससे क्षेत्रीय तनाव और मानवाधिकार को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, एर्फान कियानी नाम के व्यक्ति को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद से कथित संबंध और सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में मौत की सजा दी गई। ईरान की न्यायपालिका से जुड़ी एजेंसी मिज़ान के मुताबिक, कियानी को इस्फहान में सुरक्षा बलों पर हमले, आगजनी, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और “आतंक फैलाने” जैसे गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया था।
सुरक्षा और जासूसी के आरोप
ईरानी अदालत ने कियानी को “मोसाद का किराए का गुंडा” बताते हुए कहा कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद थे। आरोप है कि वह इस्फहान परमाणु केंद्र और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा गतिविधियों में बाधा डालने की कोशिश कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट से सजा की पुष्टि के बाद, उसे शनिवार सुबह फांसी दे दी गई।
ईरान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ सख्त संदेश है। वहीं, यह फांसी ऐसे समय में दी गई है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है।
विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा मामला
जानकारी के अनुसार, एर्फान कियानी को जनवरी 2026 में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भी सक्रिय बताया गया था। ईरानी प्रशासन का आरोप है कि इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों, विशेष रूप से इजरायल और पश्चिमी देशों का समर्थन था। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन मामलों में पारदर्शिता की कमी है और कई बार मुकदमे बंद कमरे में चलाए जाते हैं।
ट्रंप के दावे और ईरान की कार्रवाई
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है, खासकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके हस्तक्षेप से ईरान में फांसी की घटनाओं में कमी आई है। हालांकि, ताजा फांसी ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान में पिछले कुछ हफ्तों में कई लोगों को मोसाद से कथित संबंधों और देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में फांसी दी जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिलसिला ईरान की आंतरिक सुरक्षा नीति के सख्त रुख को दर्शाता है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
मानवाधिकार संगठनों ने ईरान की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि कई मामलों में आरोपियों को उचित कानूनी सहायता और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं दिया जाता। साथ ही, फांसी की बढ़ती संख्या को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ रही है।
अमेरिका-ईरान वार्ता की संभावना
इसी बीच, क्षेत्रीय कूटनीतिक हलकों में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, मौजूदा घटनाओं के बाद यह वार्ता कितनी आगे बढ़ पाएगी, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर जहां कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर फांसी और सुरक्षा कार्रवाइयों से तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।
ईरान की यह ताजा कार्रवाई न केवल घरेलू राजनीति को प्रभावित कर रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकार और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है।

