ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले में 10 अमेरिकी सैनिक घायल, पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर
रियाद: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस हमले में 10 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि बाकी आठ सैनिक भी गंभीर रूप से घायल हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ओर से किए गए इस हमले में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक प्रवक्ता के मुताबिक, इस संघर्ष के दौरान अब तक 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। इनमें से अधिकांश सैनिकों को इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर वापस भेज दिया गया है। हालांकि, इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो चुकी है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
सैटेलाइट इमेज से हुआ नुकसान उजागर
हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर भारी नुकसान देखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में अमेरिका का एक KC-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट पूरी तरह नष्ट हो गया, जबकि कई अन्य लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचा है। यह एयर बेस अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां बड़ी संख्या में हथियार और सैन्य विमान तैनात रहते हैं।
हमले से पहले चेतावनी
सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने इस हमले से पहले कतर, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इजरायल को चेतावनी दी थी। ईरान ने कहा था कि वह अपने ठिकानों के आसपास के इलाकों को खाली कर दे, ताकि किसी भी संभावित नुकसान से बचा जा सके।
अमेरिका का कड़ा रुख
इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने सख्त बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका बिना जमीनी सेना उतारे भी अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ईरान की नेवी और एयरफोर्स को पूरी तरह नष्ट कर देगा और उनके मिसाइल सिस्टम को भी खत्म कर देगा, ताकि ईरान भविष्य में किसी प्रकार का खतरा न बन सके।
रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर रहा है और इसके लिए जमीनी सैनिकों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उनके इस बयान से साफ है कि अमेरिका इस संघर्ष में पीछे हटने के मूड में नहीं है।
अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की संभावना
हालांकि, दूसरी ओर यह खबर भी सामने आई है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1000 सैनिकों को तैनात किया जा सकता है। इसके अलावा, 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने की भी चर्चा चल रही है, जिनमें पैदल सेना और बख्तरबंद वाहन शामिल हो सकते हैं।
संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद
इस बीच, अमेरिका की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यह संघर्ष लंबा नहीं चलेगा और आने वाले कुछ हफ्तों में हालात सामान्य हो सकते हैं। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव इस बात का संकेत है कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है, ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े।

