7 Jun 2026, Sun

इंडो-पाक इंटरनेशनल बॉर्डर से 15 किमी तक अतिक्रमण पर सख्ती, 41 सरहदी गांवों का बनेगा सिक्योरिटी मैप

जैसलमेर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राजस्थान प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जैसलमेर जिला प्रशासन ने सीमा क्षेत्र में होने वाले अवैध कब्जों और निर्माण कार्यों की पहचान के लिए व्यापक सर्वेक्षण अभियान शुरू करने की तैयारी की है। प्रशासन का कहना है कि सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी अतिक्रमणों की जांच की जाएगी और नियमों के विपरीत पाए जाने वाले मामलों पर दिवाली से पहले कार्रवाई की जाएगी।

जिला कलेक्टर Anupama Jorwal ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। इस बैठक में सभी सीमा से जुड़े जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश

प्रशासन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सीमा के आसपास भूमि उपयोग, निर्माण गतिविधियों और अतिक्रमण की स्थिति का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा।

कलेक्टर ने कहा कि सीमा क्षेत्र संवेदनशील होता है, इसलिए वहां होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखना जरूरी है। सर्वे के दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं किसी सरकारी या प्रतिबंधित भूमि पर अवैध कब्जा तो नहीं किया गया है। यदि किसी प्रकार का अनधिकृत निर्माण या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

50 किलोमीटर तक निगरानी बढ़ाने के निर्देश

प्रशासन को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में मौजूद निर्माण कार्यों और भूमि उपयोग की नियमित निगरानी की जाए। इससे सीमा सुरक्षा एजेंसियों को भी संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों का मानना है कि सीमा क्षेत्र में अवैध निर्माण और अनियंत्रित गतिविधियां सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती हैं। इसलिए समय रहते ऐसे मामलों की पहचान कर कार्रवाई करना आवश्यक है।

सूचना तंत्र को किया जाएगा मजबूत

जिला प्रशासन केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, सीमा सुरक्षा बल (BSF), खुफिया ब्यूरो (IB) और सैन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।

कलेक्टर ने बताया कि विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच नियमित मासिक बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साझा की जा सके।

स्थानीय लोगों की भी होगी भागीदारी

सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। प्रशासन पटवारियों, पशुपालकों, पूर्व सैनिकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से एक मजबूत स्थानीय सूचना नेटवर्क तैयार करेगा। यह नेटवर्क क्षेत्र में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सुरक्षा और विकास दोनों पर जोर

प्रशासन का कहना है कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा। अभियान का उद्देश्य केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है।

निष्कर्ष

जैसलमेर प्रशासन का यह कदम सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। अतिक्रमणों की पहचान, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और मजबूत सूचना तंत्र के जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में यह अभियान पूरे क्षेत्र में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा, जिससे सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सुरक्षा दोनों को बेहतर बनाया जा सके।

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